Blogs about: Apne Lamhe

शब्द होते हैं कीमती-कविता साहित्य 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: कुछ पल की खामोशी से यूं मन खिल जाता जो चिल्ला कर कहने की होती इच्छा उसे पी जाने का ख्याल आता अपनी जु … more →

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संत कबीर वाणी: साधू वह जो समदर्शी हो

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: जौन चाल संसार के जौ साधू को नाहिं डिंभ चाल करनी करे, साधू कहो मत ताहिं संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते … more →

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शांति ढूंढते शोर के बाजार में

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: अपने ख्यालो में  दुनियाँ भर की दौलत जुटाने  घर-परिवार के लिये  हर तरह की सुविधाएं बनाने का खूबसूरत स … more →

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प्रायश्चित और स्वाभिमान-कहानी

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago:     अमीर की पूंजी होती है उसकी खुद की मेहनत से कमाई या पुरखों से प्राप्त दौलत और अहंकार जबकि गरीब की … more →

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झुग्गी-झौंपडी की जगह महल का चित्र

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago:    स्कूल में बच्चों को प्रोत्साहन देने के लिए ड्राइंग के शिक्षक ने चित्रकार प्रतियोगिता का आयोजन किय … more →

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लड़ते रहो, हमें किसी तरह हिट होना है

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago:   (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक हैं और किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है) लड़ते रहो दोस्तो … more →

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प्राकृतिक सौन्दर्य हैं मौन 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: रात्री में चन्दा बिखेरता अब भी पहले की तरह शीतल चांदनी पर उसका आनन्द उठाएँ कौन दूरदर्शन और कम्प्यूटर … more →

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चमत्कार का व्यापार होता है यहाँ

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: (यह व्यंग्य रचना काल्पनिक तथा किसी व्यक्ति या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है ) देखो वही अपनी जिन्दगी … more →

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हम तो आये थे ढाई आखर प्रेम के लिखने

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: (यह काल्पनिक व्यंग्य रचना है इसका किसी व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है ) कहते हैं हमारे भैया ढा … more →

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धनी मदांध से विनम्र निर्धन की दोस्ती भली

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाता है पर रात को जो भटका वह सुबह तक वापस नहीं आये तो घर में तूफ़ान मच … more →

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देवराज इन्द्र ने कहा- चलते रहो, चलते रहो

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: देवराज इंद्र द्वारा राजा हरिश्चन्द्र के पुत्र रोहित को उपदेश के रुप में संस्कृत में दिए गये श्लोक का … more →

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सदियों से खडे बुत चलते नजर आ रहे हैं

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: बौद्धिक अँधेरे में ज्ञान के चिराग कुछ यूँ बेचे जा रहे हैं सदियों से अपनी जगह खडे बुत भी लोगों को चलत … more →

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क्या वह झगड़ा फिक्स था-कहानी

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: (यह कहानी काल्पनिक है और इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है) बोस उस पर चिल्ला रहा था- … more →

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मुख, मुखौटा और सिंहासन-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: मुखों की बैठक में सिंहासन पर मुखोटा रखने का मसला उठा था सबके चेहरे थे दागदार चुनाव के जुए में लोगों … more →

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लिखने में मजा आता है

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: आज दीपकबापू…पर निष्काम और सहज भाव से लिखो, बदलाव आते रहेंगे  लेख पर मुझे मेरे एक साथी ने ईमेल … more →

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ज़िन्दगी के बदलते रंग

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: उनके इन्तजार में गुजारे कयी बरस जिन्हें कभी हमारी याद न आयी जब वह आये हमारे घर  उनका बदल रुप देखकर ल … more →

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मोहब्बत एक ख़्वाब है

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: ताज मोहब्बत की निशानी है जो मरने के बाद निभानी है इसीलिये हर आशिक़ बनाने का वादा करता जाता यह सोचकर क … more →

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सुख चाहते हो तो दहेज़ से करो परहेज

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago:                    एक सुबह से टीवी समाचार चैनलों पर दहेज़ पर विवाद की तीन खबरें एक साथ चल रहीं थी। ए … more →

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आकाश में धरती:फिर स्वर्ग और नरक कहॉ है?

दीपक भारतदीप wrote 6 years ago:                            वैज्ञानिकों ने आसमान एक धरती का अस्तित्त्व खोज निकाला है, उनके दावों पर अ … more →

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