देखे हैं इन्सान बहुत सब ही हैं हैरान बहुत ऐ ख़ुदा अब बस भी कर दे हो गए इम्तिहान बहुत कुछ रातें अब भूखी होंगी आए हैं महमान बहुत सच कहना कितना मुश्क़िल था लगता था आसान बहुत जाने कैसे कर गुज़रा सब मै भी हूं… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: देखे हैं इन्सान बहुत सब ही हैं हैरान बहुत ऐ ख़ुदा अब बस भी कर दे हो गए इम्तिहान बहुत कुछ रातें अब भूख … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं तुम भी देके देख लो, ग़म स … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सुबह सुबह कुछ ख़याल आये ज़हन में तो लब्ज़ों ने ढ़ाल दिये…. ग़ज़ल लिखने की कोशिश की किंतु अधिक समय नह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी पास खींच लाएगी इक न इक आस खींच लाएगी तुझे भी एक दिन इस कुँए तक तेरी ही प्यास खींच लाएगी दुआ द … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कोई हमें भाता नहीं उस मेहरबां को छोड़कर और कुछ मिलता नहीं उससे फ़ुगां को छोड़कर अपनी अपनी है तमन्ना अपन … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आपको अब भी बहुत कुछ देखना है आज तक जो भी हुआ प्रस्तावना है चाँद तक जाने की राहें खोज लीं दिल से दिल … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मरने की दुआ दे दो हमको जीने का तमाशा और नहीं इस रंज मुसीबत ग़म से भरी दुनिया की तमन्ना और नहीं साहिल … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: देख आऊं वो गिरा खून कहीं मेरा तो नहीं मेरी ही लाश सजी हो कहीं ऐसा तो नहीं टूट ही जाते हैं ख़्वाब, साँ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कोई बिकाऊ चीज तू ईमान को न बोल बेकार ज़रा अपनी ही पहचान को न बोल लब्ज़ों को पढ़ते हो समझ लो तो कोई मतलब … more →