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हो गए इम्तिहान बहुत7 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: देखे हैं इन्सान बहुत सब ही हैं हैरान बहुत ऐ ख़ुदा अब बस भी कर दे हो गए इम्तिहान बहुत कुछ रातें अब भूख … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, apr 2008, मेरी गज़लें, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं6 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं तुम भी देके देख लो, ग़म स … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, apr 2008, मेरी गज़लें, 2008, April, आज, उन, कविता, का

शौक़ है5 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: सुबह सुबह कुछ ख़याल आये ज़हन में तो लब्ज़ों ने ढ़ाल दिये…. ग़ज़ल लिखने की कोशिश की किंतु अधिक समय नह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, apr 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

खींच लाएगी1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी पास खींच लाएगी इक न इक आस खींच लाएगी तुझे भी एक दिन इस कुँए तक तेरी ही प्यास खींच लाएगी दुआ द … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, apr 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

अहलेमोहब्बत3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: कोई हमें भाता नहीं उस मेहरबां को छोड़कर और कुछ मिलता नहीं उससे फ़ुगां को छोड़कर अपनी अपनी है तमन्ना अपन … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, apr 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

आज तक जो भी हुआ प्रस्तावना है4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: आपको अब भी बहुत कुछ देखना है आज तक जो भी हुआ प्रस्तावना है चाँद तक जाने की राहें खोज लीं दिल से दिल … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, apr 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

और नहीं1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: मरने की दुआ दे दो हमको जीने का तमाशा और नहीं इस रंज मुसीबत ग़म से भरी दुनिया की तमन्ना और नहीं साहिल … more →

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कोई मुग़ालता तो नहीं4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: देख आऊं वो गिरा खून कहीं मेरा तो नहीं मेरी ही लाश सजी हो कहीं ऐसा तो नहीं टूट ही जाते हैं ख़्वाब, साँ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, apr 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

न बोल1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: कोई बिकाऊ चीज तू ईमान को न बोल बेकार ज़रा अपनी ही पहचान को न बोल लब्ज़ों को पढ़ते हो समझ लो तो कोई मतलब … more →

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