दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चंद पलों की खुशी की खातिर पूरी जिन्दगी दाव पर लगा देना भला कौनसी अक्लमंदी है सब कुछ करते हैं हम अपने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अभी हुई है भोर शुरू कर दिया उन्होने शोर कैसे न होंगे दिन भर बोर जहाँ मौन रखकर ध्यान करना था वहाँ लग … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वादों के बादल बरसने का मौसम जब आता है यादों पर ग्रहण लग जाता है जजबातों के सौदागर तय करते हैं कि कौन … more →