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गंगा और यमुना नदियों की तरह होता है हिन्दी भाषा का दोहन-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अंतर्जाल पर हिंदी में सक्रिय कई ऐसे ब्लाग लेखक हैं जिन्हें लिखते हुए छह साल हो गये हैं। उन लोगों की … more →

Tags: writing, inglish, दीपक द्वारा, अभिव्यक्ति, India, अनुभूति, Internet, Urdu, Family

सादगी से कही बात किसी के समझ में नहीं आती-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: सादगी से कही बात किसी को समझ में नहीं आती है इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की चाशनी में डुबो कर सुन … more →

Tags: हिन्दी, Internet, bharat, India, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, कविता, web dunia, web duniya

बाज़ार में बिकती है दवा और अमृत-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: सादगी से कही बात किसी को समझ में नहीं आती है इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की चाशनी में डुबो कर सुन … more →

Tags: Anubhuti, Article, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, शायरी, शेर-ओ-शायरी, सन्देश

अंतर्जाल पर अंग्रेजी से नहीं बल्कि हिन्दी से ही बदलाव हो सकता है=आलेख

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: अंतर्जाल के ब्लाग पर सामाजिक आंदोलन और जागरुकता के लिये प्रयास कोई अब नयी बात नहीं है। कुछ लोगों ने … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, alekh, editoriyal, Internet, Anubhuti

इंसान को पंख नहीं लगा सकता-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जमीन पर आते हुए इंसान ने सर्वशक्तिमान से कहा ‘इस बार इंसान बनाया है इसके लिये शुक्रगुजार हूं पर मुझे … more →

Tags: writing, Global Dashboard, कविता, दृष्टिकोण, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, अनुभूति, हिंदी साहित्य, Internet

अभी मशहूर नहीं हो सकते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: घर आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू हमें तुम पर बहुत तरस आता लिखते हुए बीत गए कई बरस पर तुम्हारा नाम क … more →

Tags: bharat, Education, Bloging, Blogger, Blogging, Deepak bharatdeep, अभियान, रास्ता, बौना

समाज की इमारत में आदमी पत्थर की तरह लग जाते-कविता साहित्य

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: हर पल लोगों के सामने अपना कद बढाने की कोशिश हर बार समाज में सम्मान पाने की कोशिश आदमी को बांधे रहती … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, alekh, abhivyakti, Internet, bharat, India

कहने वाले का कहना ही है व्यापार-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: एक सपना लेकर सभी लोग आते हैं सामने दूर कहीं दिखाते हैं सोने-चांदी से बना सिंहासन कहते हैं ‘तुम उस पर … more →

Tags: abhivyakti, alekh, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, चिंतन, दीपक भारतदीप, दोहे, मस्तराम

आखिर उसने इस ब्लाग के पूर्व पाठ की कापी क्यों नहीं की-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उसने कल मेरा इसी ब्लाग पर लिखा गया आलेख पढ़ा और इसलिये उसने उसकी कापी नहीं की क्योंकि इसमें उसी पर आ … more →

Tags: Blogroll, vews, hindiblogroll, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Life, media

दूसरे के कहने पर मार्ग बदलना नहीं-आलेख3 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जब अपने किसी लक्ष्य या उद्देश्य का पता हो और उसी मार्ग पर हमारे कदम बढ़ रहे हों तो किसी के कहने पर आ … more →

Tags: Blogroll, vididha, inglish, अभिव्यक्ति, vishvaas, अनुभूति, संवेदना, हिंदी साहित्य, साहित्य

हिंदी में उर्दू शब्दों के उपयोग पर सावधानी जरूरी-आलेख9 comments

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: हिंदी भाषा में उर्दू के शब्दों का प्रयोग इतना आम है कि लोग हिंदी व उर्दू के शब्दों के अंतर का ध्यान … more →

Tags: Blogroll, inglish, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, हिंदी साहित्य, साहित्य, media, Education

काला और सफेद बाजार-हास्य कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अर्थशास्त्र के ‘मांग और आपूर्ति का नियम’ उन्होंने कुछ इस तरह समझाया ‘जब कारखाने में चीज बनती हो पर ब … more →

Tags: inglish, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, India, bharat, चिन्तन, हिंदी साहित्य, साहित्य, Shayri

खून की तरह दर्द भी बेचते हैं लोग-हिन्दी शायरी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शहर का गुलशन उन्होंने उजाड़ कर अपने पत्थरों का घर सजा लिया जब हवाओं ने दिया धोखा तो साँसों का सिलेंड … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, शायरी

बनते बिगड़ते हैं रंग और इंसान -कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पल रंग बदलती दुनियां में रिश्ते भी बदलते हैं रंंग जो सारी उमर साथ चलने का एलान करते सरेआम वह कभी नही … more →

Tags: vyangya, vividha, inglish, संपादकीय, कविता, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India

कुछ इधर की, कुछ उधर की-व्यंग्य आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं जैसे ही स्कूटर से उतरा तो मेरे मित्र ने मुझे देखते ही कहा-‘पिटवा दी भद्द। टोक दिया न उडन तश्तरी … more →

Tags: inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, Internet, Bloging, Education

चाणक्य नीति:शास्त्रों की निंदा करने वाले अल्पज्ञानी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.आकाश में बैठकर किसी से वार्तालाप नहीं हो सकता, वहां कोई किसी का संदेश वाहक न जा सकता है और न वहां … more →

Tags: आलेख, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, hindi, jagran, alekh, adhyatm, editoriyal, Internet

रेल की बोगी में ज्ञान की किताबें बेच सकते हैं, ज्ञान नहीं-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वृंदावन की यात्रा कर हम दोनों पति-पत्नी दोनों ही खुश होते हैं। इस बार जब हम दोनों वहां पहुंचे तो बर … more →

Tags: Blogroll, writing, vyangya, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, सूचना

आखिर इसमें खास क्या है-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जहां तक मेरी जानकारी है खबर में यही था कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद उम्मीदवार ओबामा अपनी जेब में र … more →

Tags: Blogroll, inglish, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, भारत, bharat, अनुभूति, संवेदना, हिंदी साहित्य

शब्द हमेशा हवाओं में लहराते हैं-कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता है जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो … more →

Tags: Blogroll, vews, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, media, Internet


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