दीपक बापू तेजी से अपनी राह चले जा रहे थे कि पान की एक दुकान के पास खड़े आलोचक महाराज ने उनको आवाज देकर पुकारा-‘अरे, ओए फ्लाप कवि कहां जा रहे हो, कहीं सम्मान वम्मान का जुगाड़ करना है क्या?’ दीपक बापू चैं… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: इस देश का आदमी उड़ना चाहता है ऊंची उड़ान अपने पांवों में पुरानी ज़जीरों को बांधकर. अपनी आँखों स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: दीपक बापू तेजी से अपनी राह चले जा रहे थे कि पान की एक दुकान के पास खड़े आलोचक महाराज ने उनको आवाज देक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: गिला शिकवा खूब किया दिन भर पूरे जमाने का फिर भी दिल साफ हुआ नहीं। इतने अल्फाज मुफ्त में खर्च किये फि … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: ज़िन्दगी के देखे दो ही रास्ते एक बागों की बहार दूसरा उजाड़ की कगार का. चलती है टांगें मकसद तय करता ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: तथैव योगविहितं यत्तु कर्म नि सिध्यति। उपाययुक्तं मेधावी न तव्र गलपयेन्मनः।। हिंदी में भावार्थ-अच्छे … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भारतीय अध्यात्मिक ज्ञान में व्यक्ति को सदैव सकारात्मक सोच की प्रेरणा दी जाती है। इसके पीछे मुख्य कार … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: सहज कार्यजश्वव द्विविधः शत्रु सच्यते। सहज स्वकुलोत्पन्न कार्यजः स्मृतः। हिंदी में भावार्थ-शत्रु दो प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: गुलाम राज कर रहे हैं यहां गुलाम पर। कोई छोटा है कोई उससे बड़ा यूं नाम भर। हुक्म चले नहीं पहुंचता है म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: समाज सेवाध्यक्ष जी ने अपनी बाहें टेबल पर टिकाई अपना मूंह हथेलियों पर रखने को बाद अपने सात सभासदों की … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अर्थसिद्धि परामिच्छन् धर्ममेवादितश्चरेत्। न हि धर्मदपैत्यर्थः स्वर्गलोकादिवामृतम्।। हिंदी में भावार् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जरुरतों की शयों का रोज शक्ल बदलना दौलत के पहाड़ पर इंसानों की चाहतों का चढ़ना तरक्की का यह पैमाना नहीं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: किसी फिल्म अभिनेता को जब सदी का महानायक कहा जाता है तब उसके प्रशंसकों को बहुत अच्छा लगता है पर अगर थ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अक्सर सोचते हैं कि कहीं कोई अपना मिल जाए अपने से हमदर्दी दिखाए मिलते भी हैं खूब लोग यहाँ पर इंसान और … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नोबल पुरस्कार देने वालों ने वाकई हास्यास्पद स्थिति का निर्माण किया है। उन्होंने अमेरिका के कट्टर विर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सुबह दीपक बापू सड़कों पर पानी से भरे गड्ढों में गिरने से बचते हुए जल्दी जल्दी ही आलोचक महाराज के घर प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: महात्मा गांधी के दर्शन की प्रासंगिकता आज भी है। इसमें संदेह नहीं है। अगर कहें आज अधिक है तो भी कोई ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ————————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मीडिया यानि टीवी चैनल और समाचार पत्र-जिनकों हम संगठित प्रचारतंत्र भी कह सकते हैं-बिना सनसनी के नहीं … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →