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Blogs about: Aritile In Hindi

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सामूहिक ठगी का मतलब-व्यंग्य चिंत्तन (samuhik thagi ka matlab-vyangya lekh)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: एक के बाद एक सामूहिक ठगी की तीन वारदातें टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गयी हैं। आप यह … more →

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बुढ़ापे में कुछ नहीं सीख सकते-हिन्दू अध्यात्मिक संदेश (In old age can not learn anything - Hindu spiritual message)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— यावत्स्वस्थमिदं शरीरमरुजं याव … more →

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लिखने की बीमारी जो है-व्यंग्य आलेख (likhne ki bimari-hindi hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अंतर्जाल पर रचनाकर्म कोई आसान काम नहीं है। जो लेखक, कलाकर या कार्टूनिस्ट स्वयं न लिखकर दूसरे को अपनी … more →

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दक्षिण भारत की भावुकता अस्वाभाविक नहीं-आलेख (bhakti in south india-hindi lekh)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: फिल्मी अभिनेताओं और नेताओं के प्रति दक्षिण भारतीय लोगों की भावुकता देखकर अनेक लोग हतप्रभ रह जाते हैं … more →

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देशभक्ति के भाव को सस्ता बनाने से लाभ नहीं-आलेख (deshbhakti ka bhav-hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: हम बचपन में 15 अगस्त और 26 जनवरी पर स्कूल में जाते थे तब पहले रेडियो पर तथा बाद में राह चलते हुए दुक … more →

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नस्लवाद और गुणों का स्वरूप-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: शायद कुछ समाज सुधारकों को यह बुरा लगे पर सच यही है कि इस धरती पर पैदा हर जीव की नस्ल होती है और उसमे … more →

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चौथे ब्लाग ने भी अर्जित किये चार अंक-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: आज बैठे ठाले अपने ब्लाग की पैज रैंक देखने का विचार आया तो पता लगा कि एक अन्य ब्लाग/पत्रिका ई7पत्रिका … more →

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समूह की गुलामी से मुक्ति ही है असली आज़ादी-चिंत्तन आलेख 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: अगर किसी समुदाय का एक जोड़ा अपने किसी दूसरे समुदाय की रीति के अनुसार विवाह करता है तो क्या उस समुदाय … more →

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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-दुष्ट अमीर शासन को परेशान करता है

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्रण … more →

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समाज सुधार के लिये प्रचारात्मक प्रयास की आवश्यकता-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: समाज को सुधारने की प्रयास हो या संस्कृति और संस्कारों की रक्षा का सवाल हमेशा ही विवादास्पद रहा है। इ … more →

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मेहनतकश की कलम से-चिंतन आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भूतपूर्व मजदूर की डायरी से-आलेख जिन लोगों ने जीवन में कभी मजदूरी या मेहनतकश बनकर पैसा नहीं कमाया उनक … more →

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बदलाव-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: वहां महफिल जमी हुई थी। अनेक विद्वान समाज की समस्याओं पर विचार करने के लिये एकत्रित हो गये थे। एक विद … more →

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चाणक्य नीतिः महल पर बैठने से कौआ गरुड़ नहीं हो जाता।

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: न निर्मितः केन न दृष्टपूर्वः न श्रूयते हेममयः कुरंगः। तथापि तृष्णा रघुनंदनस्य विनाशकाले विपरीत बुद्ध … more →

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जोरदार और रंगीन तकदीर वह लिखा लाये-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: आसमान से जमीन पर आते हुए लिखा लाये हैं वह अपनी रंगीन तकदीर। न ख्याल उनका अपना न कोई सोच अपनी पर जमान … more →

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‘कोई नहीं’ की चाहत मत करना (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: आप सुबह किसी दुकान पर जाकर ऐसे ही खड़े होकर वहां रखी चीजें देखिये तो दुकानदार आपसे पूछेगा‘ आपको कौनसी … more →

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इन्टरनेट की तकनीकी जानकारी प्रयोक्ताओं को देना जरूरी -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: देश में इंटरनेट कनेक्शन की संख्या बढ़ती जा रही है। टेलीफोन कंपनियों का इससे राजस्व बढ़ रहा है। यह कंपन … more →

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इन्सान अब बुत बनने लगे हैं - हास्य व्यंग्य कविताएँ1 comment

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: असली इंसानों के चेहरे अब बुत की तरह नजर आते। लिखता कोई और संवाद, वह बोलते हुए दिख जाते।। बहुत पढ़ लि … more →

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धन तो आदमी को चूहे से शेर बना देता है-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: सुनने में आया है कि मंदी की वजह से आतंकवादी भी पस्त हो रहे हैं। एक टीवी चैनल के अनुसार पाकिस्तान अपन … more →

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सभी पियक्कड़ हो जाते, जो पहुंचे मधुशाला-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →

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