तन चंचला मन निर्मला व्यवहार कुशला भाषा कोमला सदैव समर्पिता | नदिया सा चलना सागर से मिलना खुद को भुलाकर भी अपना अस्तित्व सभलना रौशन अस्मिता | सृष्टि की जननी प्रेम रूप धारिणी शक्ति सहारिणी … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: तन चंचला मन निर्मला व्यवहार कुशला भाषा कोमला सदैव समर्पिता | नदिया सा चलना सागर से मिलना खुद … more →