एक लम्बे अरसे बाद आज मैं आवाजें पर लौटा हूँ और इस बिलम्ब के लिए आवाजें के पाठकों से माफ़ी चाहूँगा| हबीब तनवीर जी पर लिखे और हिमाचल मित्र पत्रिका के शरद अंक में छपे अपने एक लेख को आपके समक्ष रख रहा हूँ … more →
आवाजें - बेखौफ गूंज़ती हुईAjay Saklani wrote 3 days ago: एक लम्बे अरसे बाद आज मैं आवाजें पर लौटा हूँ और इस बिलम्ब के लिए आवाजें के पाठकों से माफ़ी चाहूँगा| हब … more →
Ajay Saklani wrote 5 months ago: हिन्दी समय कार्यक्रम चल रहा था, और मशहूर रंगकर्मी और निर्देशक हबीब तनवीर जी के नाटक “चरणदास चो … more →
Ajay Saklani wrote 5 months ago: हमारे देश के विद्वान् लगातार इस बात पर ज़ोर देते रहते हैं कि हम हिन्दुस्तानी होकर शायद अपनी भाषा हिन् … more →