अक्सर सोचते हैं कि कहीं कोई अपना मिल जाए अपने से हमदर्दी दिखाए मिलते भी हैं खूब लोग यहाँ पर इंसान और शय में फर्क नहीं कर पाते. हम अपने दर्द छिपाते लोग उनको ही ढूंढ कर ज़माने को दिखाने में जुट जाते कोई … more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***wrote 5 days ago: मुड मुड के ना देख रीमिक्सः घनश्याम ठक्कर फिल्मः श्री ४२० साल मुबारक २०१० क्लब_ओएसीस Happy New Year 2 … more →
wrote 1 week ago: . . Merry Christmas . . (MP3) Music & Art: Ghanshyam Thakkar … more →
wrote 2 months ago: अक्सर सोचते हैं कि कहीं कोई अपना मिल जाए अपने से हमदर्दी दिखाए मिलते भी हैं खूब लोग यहाँ पर इंसान और … more →