संसार विषवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे। सुभाषितं च सुस्वादु संगतिः सुजने जनै।। हिन्दी में भावार्थ-नीति विशारद चाणक्य जी कहते हैं कि इस विषरूपी संसार में दो तरह के फल अमृत की तरह लगते हैं। एक तो सज्जन लो… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संसार विषवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे। सुभाषितं च सुस्वादु संगतिः सुजने जनै।। हिन्दी में भावार्थ-नीति … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आसमान से अब फ़रिश्ते नहीं आते विचार खुले होना अच्छा है पर आंख्ने भी खुली रखना यकीन करना अच्छा है पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अमीरों के घर और होटलों पर मनाते जश्न भला गरीब कहाँ देख पाते हैं पर भरते हैं जो आहें अपनी गरीबी देख … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ऐसा व्यक्ति अविश्वसनीय होता है जो क्रुद्ध होने पर सारे भेद देता है। ऐसा व्यक्ति कदापि म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.एक सज्जन व्यक्ति के घर से बैठने या विश्राम के लिए भूमि, तिनकों से बने आसन, जल तथा मृदु वचन कभी दूर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने धन की हानि, अपने मानसिक संताप, अपने घर-परिवार के सदस्यों के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.अपनी क्षीण वृति, अर्थात आय की कमी से तंग होकर जो व्यक्ति रास्ते में पड़ने वाले खेत से कुछ कंद … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जिसके प्रति लगाव(सच्चा प्यार) वह दूर होते हुए भी पास रहता है। इसके विपरीत जिसके प्रति लगाव नहीं है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १. यदि आप सफलता हासिल करना चाहते हैं तो गोपनीयता रखना सीख लें. जब किसी कार्य की सिद्धि के लिए कोई यो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.शास्त्रों की संख्या अनन्त, ज्योतिष,आयुर्वेद तथा धनुर्वेद की विद्याओं की भी गणना भी नहीं की जा सकती … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भाषण करते हुए वह बोले ”हम अब प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं सारी दुनिया हमारी प्रशंसक है हमारे शे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.आंखों से देखभाल का पैर रखें, पानी कपडे से छान कर पीयें. शास्त्रानुसार वाक्य बोलें, मन में सोच कर क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी विशेष अंग में विष होता है-जैसे सर्प के दांतों में मक्खी के मस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.जिस देश में मूर्खों का सम्मान नहीं होता, अन्न संचित रहता है तथा पति-पत्नी में झगडा नहीं होता वहाँ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.सुखद गृहस्थी और परिवार की सुख समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है की परिवार का स्वरूप कैसा है. जहाँ प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इस संसार की तुलना एक कड़वे वृक्ष से की जाती है जिस पर पर अमृत के समान दो फल भी लगेते हैं-मधुर वचन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.शास्त्रों की संख्या अनन्त, ज्योतिष,आयुर्वेद तथा धनुर्वेद की विद्याओं की भी गणना भी नहीं की जा सकती … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत समय से देश के विकास होने के प्रचार का मैं टीवी चैनलों और अख़बारों में सुनता आ रहा हूँ. तमाम त … more →