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पत्थर का बोझ-हास्य व्यंग्य कवितायेँ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रस्तर की इमारतों को दिखाकर वह उसका इतिहास बताते हैं सुनने वाले निहारते हुए स्वयं भी पत्थर हो जाते … more →

Tags: क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, साहित्य, हास्य व्यंग्य

उनको चैन नहीं आता -हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी … more →

Tags: इंटरनेट, दीपक भारतदीप, शब्द, हिन्दी, Shayri, Sher, Urdu, आदमी, ठेकेदार

थप्पड़ मारकर सलाम तो किया-तीन क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कुत्ता कहा तो क्या इनाम तो दिया आखिर गोरों ने दिया गुलाम की तरह व्यवहार किया तो क्या थप्पड़ मारकर सल … more →

Tags: दीपक भारतदीप, हिन्दी, Blogger, Deepak bharatdeep, Family, Friends, hasya kavita, hasya vyang, hasya -vyangya

आदमी ख़ुद ही खिलौना बन जाता -हिंदी व्यंग्य शायरी

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →

Tags: inglish, कविता, bharat, India, web dunia, web bhaskar, web navabharat, अभिव्यक्ति, अनुभूति

बाज़ार में बिकती है दवा और अमृत-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: सादगी से कही बात किसी को समझ में नहीं आती है इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की चाशनी में डुबो कर सुन … more →

Tags: चिंतन, Internet, Anubhuti, सन्देश, शायरी, शब्द, साहित्य, दीपक भारतदीप, arebic

कितना गहरा खोदेंगे हम?

anileklavya wrote 4 months ago: (लेख – अरुंधती रॉय) अभी हाल ही में एक युवा कश्मीरी मित्र से मेरी बात हो रही थी कश्मीर में जीवन … more →

Tags: Arundhati Roy, अनुवाद, अरुंधती रॉय, इतिहास, भारत, लेख, साहित्य, hindi, History

अगर इतिहास को रचनात्मक होना है

anileklavya wrote 5 months ago: (लेख – हावर्ड ज़िन – 09 दिसंबर, 2006) यह निबंध हावर्ड ज़िन की सिटी लाइट्स द्वारा प्रकाशि … more →

Tags: अनुवाद, इतिहास, रचनात्मक, साहित्य, हावर्ड ज़िन, Creative, History, Howard Zinn, Literature

बम, पलटाव और भविष्य

anileklavya wrote 5 months ago: (लेख – तारिक़ अली) पिछले तीन सप्ताह से पाकिस्तान के सैनिक शासक तालिबान को इस बात के लिए मनाने … more →

Tags: Afghanistan, अनुवाद, अफ़ग़ानिस्तान, तारिक़ अली, पाकिस्तान, फ़ुटबॉल, लेख, Pakistan, Soccer

आधुनिक भारत

anileklavya wrote 5 months ago: (लेख – पी. साईनाथ – 03 अप्रैल, 2006) किसानों द्वारा आत्महत्याओं की संख्या इस हफ़्ते 400 … more →

Tags: अनुवाद, आधुनिक, पी. साईनाथ, भारत, लेख, साहित्य, हिन्दी, hindi, India

इस तरह सताते भविष्य के सपने-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अतीत के गुजरे पल ही दिमाग को इस तरह सताते कि भविष्य के सपने सामने चले आते साथ चलता तो है बस आज का सच … more →

Tags: साहित्य, Blogroll, Deepak bharatdeep, E-patrika, hindi epatrika, hindi megzine, hindi nai duinia, web dunia, web duniya

हास्य व्यंग्य-अपना अपना राग-hasya vyangya3 comments

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: देश के बुद्धिजीवियों के लिये इस समय कुछ न कुछ लिखने के लिये ऐसा आ ही जाता है जिसमें उनको संकुचित ज्ञ … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, inglish, साहित्य, हिंदी साहित्य, edcation, bharat, web duniya

ब्रहमाण्ड का रहस्य जानने का प्रयास नाकाम तो होना ही था-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: महामशीन के रूप में चर्चित महादानवीय मशीन का प्रयोग अब रुक गया है। अगर आज के सभ्य समाज में महिमा मंडि … more →

Tags: hindi, चिन्तन, व्यंग्य, bharat, Friends, web dunia, web bhaskar, web navabharat, hindi sahitya

medicainfo.com published their viewer's articles1 comment

amitblogger wrote 10 months ago: ↑ Grab this Headline Animator Yesterday 20-Aug-2008, medicainfo has published 2 articles by it … more →

Tags: health, Medical, HIV, transmission of HIV, Medical Sites, medicainfo, Health Information

समाज की इमारत में आदमी पत्थर की तरह लग जाते-कविता साहित्य

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: हर पल लोगों के सामने अपना कद बढाने की कोशिश हर बार समाज में सम्मान पाने की कोशिश आदमी को बांधे रहती … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, alekh, abhivyakti, Internet, bharat, India

श्रमिक पुत्र कभी अभिनेता नहीं बनता-हास्य कविता-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आज मजदूर दिवस है आओ सब मिलकर नारे लगायें जो गरीबों और मजदूरों को भायें जन कल्याण और न्याय के लिये ज … more →

Tags: abhivyakti, Anubhuti, अनुभूति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, शायरी, शेर

भृतहरि शतकःमनुष्य इच्छा और आशा के कारण नाचता है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: खलालापाः सोढा कथमपि तदाराश्र्चनपरैर्निगुह्मान्तर्वाष्पं हस्तिमपि शून्येन मनसा कृतश्चियत्तस्तम्भः प्र … more →

Tags: आलेख, jagran, alekh, abhivyakti, editoriyal, Internet, Friends, Anubhuti, hindu

संत कबीर वाणी:टोना-टोटका सब झूठ है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जंत्र मंत्र झूठ है, मति भरमो जग कोय सार शब्द जानै बिना, कागा हंस न होय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →

Tags: अध्यात्म, alekh, adhyatm, editoriyal, Internet, Kabir, dharm, dohe, hindu

कठपुतली का खेल तो अब भी चल रहा है (हास्य-व्यंग्य)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हम घर से बाहर निकल कर जैसे सायकल से सड़क पर आये तो  एक सज्जन मिल गये और  हमसे बोले-‘कहां जा रहे हो।’ … more →

Tags: हिन्दी, alekh, abhivyakti, editoriyal, Internet, Anubhuti, India, सन्देश, साहित्य

Translation, the author of nearly all the languages of tools will

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: I have some lessons to the Blog English translation in Hindi to read them. It is also written by In … more →

Tags: hindi, alekh, adhyatm, editoriyal, Internet, Friends, Anubhuti, bharat, India


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