सहज कार्यजश्वव द्विविधः शत्रु सच्यते। सहज स्वकुलोत्पन्न कार्यजः स्मृतः। हिंदी में भावार्थ-शत्रु दो प्रकार के होते हैं-एक तो जो स्वाभाविक रूप से बनते हैं दूसरे वह जो कार्य से बनते हैं। स्वाभाविक शत्रु … more →
** दीपक भारतदीप की अमृत संदेश-पत्रिका** Mastram Deepak Bharatdeep's Hindi express patrikaदीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: सहज कार्यजश्वव द्विविधः शत्रु सच्यते। सहज स्वकुलोत्पन्न कार्यजः स्मृतः। हिंदी में भावार्थ-शत्रु दो प … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: वस्तुध्वशक्येषु समुद्यनश्चेच्छक्येषु मोहादसमुद्यश्मश्च। शक्येषु कालेन समुद्यनश्व त्रिघैव कार्यव्यसनं … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: प्रस्तर की इमारतों को दिखाकर वह उसका इतिहास बताते हैं सुनने वाले निहारते हुए स्वयं भी पत्थर हो जाते … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: कुत्ता कहा तो क्या इनाम तो दिया आखिर गोरों ने दिया गुलाम की तरह व्यवहार किया तो क्या थप्पड़ मारकर सल … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: सादगी से कही बात किसी को समझ में नहीं आती है इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की चाशनी में डुबो कर सुन … more →
anileklavya wrote 9 months ago: (लेख – अरुंधती रॉय) अभी हाल ही में एक युवा कश्मीरी मित्र से मेरी बात हो रही थी कश्मीर में जीवन … more →
anileklavya wrote 9 months ago: (लेख – हावर्ड ज़िन – 09 दिसंबर, 2006) यह निबंध हावर्ड ज़िन की सिटी लाइट्स द्वारा प्रकाशि … more →
anileklavya wrote 10 months ago: (लेख – तारिक़ अली) पिछले तीन सप्ताह से पाकिस्तान के सैनिक शासक तालिबान को इस बात के लिए मनाने … more →
anileklavya wrote 10 months ago: (लेख – पी. साईनाथ – 03 अप्रैल, 2006) किसानों द्वारा आत्महत्याओं की संख्या इस हफ़्ते 400 … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अतीत के गुजरे पल ही दिमाग को इस तरह सताते कि भविष्य के सपने सामने चले आते साथ चलता तो है बस आज का सच … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: देश के बुद्धिजीवियों के लिये इस समय कुछ न कुछ लिखने के लिये ऐसा आ ही जाता है जिसमें उनको संकुचित ज्ञ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: महामशीन के रूप में चर्चित महादानवीय मशीन का प्रयोग अब रुक गया है। अगर आज के सभ्य समाज में महिमा मंडि … more →
amitblogger wrote 1 year ago: ↑ Grab this Headline Animator Yesterday 20-Aug-2008, medicainfo has published 2 articles by its … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हर पल लोगों के सामने अपना कद बढाने की कोशिश हर बार समाज में सम्मान पाने की कोशिश आदमी को बांधे रहती … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मजदूर दिवस है आओ सब मिलकर नारे लगायें जो गरीबों और मजदूरों को भायें जन कल्याण और न्याय के लिये जो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: खलालापाः सोढा कथमपि तदाराश्र्चनपरैर्निगुह्मान्तर्वाष्पं हस्तिमपि शून्येन मनसा कृतश्चियत्तस्तम्भः प्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जंत्र मंत्र झूठ है, मति भरमो जग कोय सार शब्द जानै बिना, कागा हंस न होय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →