नज़र वो है के जो कौन-ओ-मकां के पार हो जाये, मगर जब रू-ए-ताबां पर पड़े बेकार हो जाये, नज़र उस हुस्न पर ठहरे तो आख़िर किस तरह ठहरे, कभी जो फूल बन जाये कभी रुख़सार हो जाये, चला जाता हूं हंसता खेलता मौज-ए-हवाद… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: नज़र वो है के जो कौन-ओ-मकां के पार हो जाये, मगर जब रू-ए-ताबां पर पड़े बेकार हो जाये, नज़र उस हुस्न पर ठ … more →