रात भर दीदा-ए-ग़म नाक में लहराते रहे सांस की तरह से आप आते रहे जाते रहे खुश थे हम अपनी तमन्नाओं का ख़्वाब आएगा अपना अरमान बर-अफ़्गंदा नक़ाब आएगा नज़रें नीची किये शर्माए हुए आएगा काकुलें चेहरे पे बिखराए हुए… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: रात भर दीदा-ए-ग़म नाक में लहराते रहे सांस की तरह से आप आते रहे जाते रहे खुश थे हम अपनी तमन्नाओं का ख़् … more →