एक घुटे हुए नेता ने छंटे हुए शब्दों में भावुक तकरीर दी, भीड़ भावनाओं से चीर दी। फिर मानव कल्याण के लिए दिल खोल दान के लिए अपनी टोपी घुमवाई, पर अफ़सोस कि खाली लौट आई। टोपी को देखकर नेता जी बोले-अपमान ज… more →
The House of Hindi Poetrydevendr wrote 2 months ago: एक घुटे हुए नेता ने छंटे हुए शब्दों में भावुक तकरीर दी, भीड़ भावनाओं से चीर दी। फिर मानव कल्याण के ल … more →
Vision Raval wrote 3 months ago: … more →
devendr wrote 1 year ago: एक घुटे हुए नेता ने छंटे हुए शब्दों में भावुक तकरीर दी, भीड़ भावनाओं से चीर दी। फिर मानव कल्याण के ल … more →
devendr wrote 1 year ago: तू गर दरिन्दा है तो ये मसान तेरा है, अगर परिन्दा है तो आसमान तेरा है। तबाहियां तो किसी और की तलाश मे … more →
devendr wrote 1 year ago: डरते झिझकते सहमते सकुचाते हम अपने होने वाले ससुर जी के पास आए, बहुत कुछ कहना चाहते थे पर कुछ बोल ही … more →