फ़ासले हे दोनो में इतने फिर भी दिल से ये हे पास दूरियाँ है अनगिनत इन में मन में लिए मिलन की आस निहारते रेहते एक दूसरे को हर पल और हर मौसम नही छोड़ेंगे साथ कभी शायद लेते हे ये कसम जब मिलन की ये उमंगे स… more →
mehekदीपक भारतदीप wrote 9 months ago: जिनको माना था सरताज वह असलियत में सियार निकल आये भरोसा किया था जिन पर वह मतलब निकालकर होशियार कहलाये … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: जिनको माना था सरताज वह असलियत में सियार निकल आये भरोसा किया था जिन पर वह मतलब निकालकर होशियार कहलाये … more →
mehhekk wrote 1 year ago: फ़ासले हे दोनो में इतने फिर भी दिल से ये हे पास दूरियाँ है अनगिनत इन में मन में लिए मिलन की आस निहार … more →