Blogs about: Aug 2007
आओ कुछ ख़ामोशी सुन लो
Rohit Jain wrote 4 months ago: आओ कुछ ख़ामोशी सुन लो लब्ज़ों में सन्नाट … more »
ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई
Rohit Jain wrote 4 months ago: ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई बोल … more »
हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं
— 1 comment
Rohit Jain wrote 4 months ago: हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं मोह … more »
बस एक बार मिली थी नज़र
Rohit Jain wrote 4 months ago: बस एक बार मिली थी नज़र, देखो अब आया होश ह … more »
