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Blogs about: Aug 2007

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आज भी थोड़ा सा पढ़ के छोड़ दिया है

Rohit Jain wrote 1 year ago: आज भी थोड़ा सा पढ़ के छोड़ दिया है ज़िंदगी का एक और सफ़हा मोड़ दिया है आज फिर सोचा के चुन लूँ ख़ार कुछ नये … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, आज

आओ कुछ ख़ामोशी सुन लो

Rohit Jain wrote 1 year ago: आओ कुछ ख़ामोशी सुन लो लब्ज़ों में सन्नाटे बुन लो बिखर रहे हैं अक्स के टुकड़े टुकड़ों में ख़ामोशी चुन लो अ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, कुछ

ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई

Rohit Jain wrote 1 year ago: ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई बोलो इस से बड़ा किसी का सफ़र है कोई जिस सिम्त भी देखूँ नज़र आता है क … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, है

हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं मोहब्बत के ये सिलसिले ख़्वाब हैं आँखें हैं हैरां है दिल भी परेशां क … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, हैं

बस एक बार मिली थी नज़र

Rohit Jain wrote 1 year ago: बस एक बार मिली थी नज़र, देखो अब आया होश हमें कुछ और जी लेते खवाबों में, यूँ बेसबब आया होश हमें हाल-ए- … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, एक, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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