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किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं 4 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं हम तो तेरी वफ़ा से ड़रते हैं दुश्मनों का तो हम को ड़र ही नहीं दोस्तों … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, Aug, 2009, मेरी गज़लें, 2009, August, कविता, क़ज़ा, किसने, किसने बोला क़ज़ा से ड

मिजाज़ेज़िंदगी है काफ़िराना3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मिजाज़ेज़िंदगी है काफ़िराना कभी बातों में इसकी तुम न आना कभी होता था मै भी आशिक़ाना हुआ क्या के हुआ सब म … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Aug 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

चेहरों पे चेहरा8 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: सेहर है या कोई सहरा है लोगों सभी बातों पे क्यों पहरा है लोगों जहां कश्ती मेरी आकर रुकी है समन्दर और … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Aug 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

आज भी थोड़ा सा पढ़ के छोड़ दिया है

Rohit Jain wrote 1 year ago: आज भी थोड़ा सा पढ़ के छोड़ दिया है ज़िंदगी का एक और सफ़हा मोड़ दिया है आज फिर सोचा के चुन लूँ ख़ार कुछ नये … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Aug 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

आओ कुछ ख़ामोशी सुन लो

Rohit Jain wrote 1 year ago: आओ कुछ ख़ामोशी सुन लो लब्ज़ों में सन्नाटे बुन लो बिखर रहे हैं अक्स के टुकड़े टुकड़ों में ख़ामोशी चुन लो अ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Aug 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई

Rohit Jain wrote 1 year ago: ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई बोलो इस से बड़ा किसी का सफ़र है कोई जिस सिम्त भी देखूँ नज़र आता है क … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Aug 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं मोहब्बत के ये सिलसिले ख़्वाब हैं आँखें हैं हैरां है दिल भी परेशां क … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Aug 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

बस एक बार मिली थी नज़र

Rohit Jain wrote 1 year ago: बस एक बार मिली थी नज़र, देखो अब आया होश हमें कुछ और जी लेते खवाबों में, यूँ बेसबब आया होश हमें हाल-ए- … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Aug 2007, एक, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit


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