किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं हम तो तेरी वफ़ा से ड़रते हैं दुश्मनों का तो हम को ड़र ही नहीं दोस्तों की दुआ से ड़रते हैं इश्क़ होने का हमको ख़ौफ़ नहीं हम तो बस इंतेहा से ड़रते हैं किसी इन्सान से घबराएं… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 3 months ago: किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं हम तो तेरी वफ़ा से ड़रते हैं दुश्मनों का तो हम को ड़र ही नहीं दोस्तों … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मिजाज़ेज़िंदगी है काफ़िराना कभी बातों में इसकी तुम न आना कभी होता था मै भी आशिक़ाना हुआ क्या के हुआ सब म … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सेहर है या कोई सहरा है लोगों सभी बातों पे क्यों पहरा है लोगों जहां कश्ती मेरी आकर रुकी है समन्दर और … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आज भी थोड़ा सा पढ़ के छोड़ दिया है ज़िंदगी का एक और सफ़हा मोड़ दिया है आज फिर सोचा के चुन लूँ ख़ार कुछ नये … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आओ कुछ ख़ामोशी सुन लो लब्ज़ों में सन्नाटे बुन लो बिखर रहे हैं अक्स के टुकड़े टुकड़ों में ख़ामोशी चुन लो अ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई बोलो इस से बड़ा किसी का सफ़र है कोई जिस सिम्त भी देखूँ नज़र आता है क … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं मोहब्बत के ये सिलसिले ख़्वाब हैं आँखें हैं हैरां है दिल भी परेशां क … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: बस एक बार मिली थी नज़र, देखो अब आया होश हमें कुछ और जी लेते खवाबों में, यूँ बेसबब आया होश हमें हाल-ए- … more →