शाम सुहानी सी धूप की चादर को हटाकर बिखर गये नीले स्याह से बादल गरजत बरस… more →
pryas wrote 3 weeks ago: कल ऑफिस के काम से बाहर जाना था. गार्ड को … more →
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mehhekk wrote 2 months ago: शाम सुहानी सी धूप की चादर को हटाकर … more →
Tags: शाम सुहानी सी, Shayari, Dil, Kavita, Hindi Poem, PYAR, Sher, Mehek, mehhekk
mehhekk wrote 4 months ago: राह देखे मन प्रतिपल हर क्षण ढूँढे तु … more →
Tags: बादल मितवा, Shayari, Kavita, Hindi Poem, Love, PYAR, Sher, Mehek, mehhekk
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