मेघा आज फिर टुटके बरसे तुम मीत से माटी से ‘महक’ ऊठी , इश्क में सराबोर निकली | ================================ ये क्या हुआ ‘महक’, दीवानगी की सारी हदे पार कर ली सावन में… more →
mehekmehhekk wrote 4 months ago: मेघा आज फिर टुटके बरसे तुम मीत से माटी से ‘महक’ ऊठी , इश्क में सराबोर निकली | == … more →
mehhekk wrote 5 months ago: उमस भरी दोपहरी में गर्मी की चादर ओढ़े धूप टहल रही थी वो बादल का टुकड़ा आया झाक के देखा उसने, आँखों क … more →
mehhekk wrote 8 months ago: इन फूलों की बारिश में भीग लेते है हम भी मोहोब्बत के इत्र की महक जरा बदन पर चढा लूँ अगले मौसम तक फिर … more →
pryas wrote 1 year ago: कल ऑफिस के काम से बाहर जाना था. गार्ड को बोला की ड्राईवर को गाडी निकालने के लिये कह दे. कोई दो बजे ख … more →
mehhekk wrote 1 year ago: शाम सुहानी सी धूप की चादर को हटाकर बिखर गये नीले स्याह से बादल गरजत बरसात बूँदों का आना ,गालों पर सर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: राह देखे मन प्रतिपल हर क्षण ढूँढे तुझे मेरा बिखरा कन कन नही सुने जाते जमाने के ताने उस पर न आने के त … more →