आँगन की तपती दोपहरी में , खाट के जैसे तपता सा अपनो के चेहरो में ही , अपनो की राहें तकता सा | चेहरे की झुर्री में मुस्कान कहीं गुम हो जाती , तन्हाई में यादों की , बातें पुरानी रटता सा | इस गली से उस मो… more →
लम्हें जिन्दगी केhemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: आँगन की तपती दोपहरी में , खाट के जैसे तपता सा अपनो के चेहरो में ही , अपनो की राहें तकता सा | चेहरे क … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: आँगन की तपती दोपहरी में , खाट के जैसे तपता सा अपनो के चेहरो में ही , अपनो की राहें तकता सा | चेहरे क … more →