सखा पलाश संग तुम्हारे बचपन से रिश्ता है ना तुमसे मेरा और मुझसे तुम्हारा नैनिहाल के आँगन में पनपा ये स्नेह प्यारा अजीब सी कशिश,मीठा एहसास साथ तुम्हारा,सबसे न्यारा झुलसाती दोपहर ,गरम हवायें तनमन में जब… more →
mehekदरभंगिया wrote 2 weeks ago: कुछ दिनों से सोच रहा था क्या क्या नहीं किया कितने सालों से. कि हल्के से यह दिल भींचा आंख मली कि समझ … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: संसार के दुःख रूपी विष से हर किसी को है आघात यहाँ, इस विषरूपी दुःख दैत्य की क्या कोई नहीं है क … more →
mehhekk wrote 1 year ago: सखा पलाश संग तुम्हारे बचपन से रिश्ता है ना तुमसे मेरा और मुझसे तुम्हारा नैनिहाल के आँगन में पनपा ये … more →
mehhekk wrote 1 year ago: गुज़रे लम्हे बचपन के वो बस याद बनकर रह गये फरिश्तो के सपने देखे थे जवानी में कही ढ़ह गये जो भी सुंदर … more →