मोहोब्बतें आँखों से आँखों का फलसफा कहती खामोशियों में भी मदहोश सी बहती मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे दिल में रहती क्यों बदलासा लगता है फ़िज़ायों का वही मौसम क्यों अपनासा महसूस होता है पराया मन खुद से भी… more →
mehekalishaminta wrote 4 months ago: teri chahat k aansu ne mere takiye ko bhigoya hai teri ashiqui mein pagal dil na jane kitna roya hai … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मोहोब्बतें आँखों से आँखों का फलसफा कहती खामोशियों में भी मदहोश सी बहती मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे द … more →
mehhekk wrote 1 year ago: अपने आप में खोई,अकेली ही खड़ी थी | न जाने किस सोच में डूबी थी | लंबे घने गेसुओं को उसकी ,बहती हवा भ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नीले नभ की छुपी नीलाई शामल घटाए उस पर छाई बदरा उमड़ घूमड़ कर आई अपनी संगिनी को रहे पुकार इठलाती,बलखा … more →