तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजता आलेखन रंगोली में है दर्द में आज भी वही मज़ा न है लुत्फ़ ग़ैर की ठिठोली में इसमें क्या जाता, तेरा ख़ुदाया! जो चंद ख़ुशियाँ होतीं मेरी झोली मेँ मैं संजो रहा हूँ इक … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजता आलेखन रंगोली में है दर्द में आज भी वही मज़ा न है लुत्फ़ ग़ैर क … more →