एक बार फिर कोई प्यार से पुकार ले… प्यार से कोई मेरी ज़ुल्फ को संवार दे बोझ सभी ज़िंदगी के प्यार से उतार दे हाथ मेरा थामकर हर सफर में वो चले इस चमन से जो गई वही मुझे बहार दे प्रसून सा कहीं खिलूँ फि… more →
स्वार्थwrote 1 year ago: एक बार फिर कोई प्यार से पुकार ले… प्यार से कोई मेरी ज़ुल्फ को संवार दे बोझ सभी ज़िंदगी के प्यार … more →
wrote 2 years ago: देर तक करता रहा था मंजिल की बात हमराही जो अचानक रास्ते में ठहर गया सफर की थकन अक्सर मुझसे पूछती है स … more →
wrote 2 years ago: सुबह के इन घंटों को गुरुदेव चौपाल काल कहा करते हैं। इन्ही घंटों में उनके तमाम शिष्य गण उनके दर्शन कर … more →