बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना, आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सां होना, की मेरे क़त्ल के बाद उस ने जफ़ा से तौबा, हाय उस जूदपशेमा का पशेमां होना, हैफ़ उस चार गिरह कपड़े की क़िस्मत ‘ग़ालिब’, जिस… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना, आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सां होना, की मेरे क़त्ल के बाद उस ने … more →