गुलदस्ता - मोहोब्बत का [1] फ़िज़ा के रंग कुछ सवरने लगे है हवाओं के रुख़ कुछ बदलने लगे है सुस्त सी सर्दियों पर बिछी सूरज की रश्मि दिल में तम्मनाओ के काफिले निकलने लगे है मौसम में छाई है बसं… more →
mehekhemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: नए रगों से हुई फिर यारी, खिल गई हर फुलवारी, भूल ले बीते पतझड़ को, शुरू नए सृजन की तैयारी। हर ओर खिली … more →
mehhekk wrote 1 year ago: गुलदस्ता - मोहोब्बत का [1] फ़िज़ा के रंग कुछ सवरने लगे है हवाओं के रुख़ कुछ बदलने लगे है स … more →
mehhekk wrote 1 year ago: आई है बसंत बहार सर्द हवाए सुस्ताने लगी कोहरा भी धुआँ धुआँ कनक सी कीरने जाल बुनती कोयल गात नीत राग … more →