घर भरा है समंदर की तरह दुनियां भर की चीजों से नहीं है घर मे पांव रखने की जगह फिर भी इंसान बेचैन है चारों तरफ नाम फैला है जिस सम्मान को भूखा है हर कोई उनके कदमों मे पड़ा है फिर भी इंसान बेचैन है लोग तर… more →
*** दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका*** ***mastram Deepak Bharatdeep ki hindi Jagran Patrika***दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: सभागार के तले मंच पर चले बहसों के दौर सुबह और शाम। दिन पर चले पर नतीजा सिफर छलकते हैं फिर भी रात को … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कुछ दिन पहले तक शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि ‘सविता भाभी’ नाम की कोई वेबसाइट होगी जिस पर ‘लोकप्रि … more →