लकीरें माना ये हाथों की लकीरों ने किस्मत के राज़ छुपाए शातिर है वो,ज़िंदगी के पूरे मोहरे तुम्हे नही दिखाए चाहत है बाज़ी हो मुट्ठी में,झुझना होगा कुछ इस कदर तुम कहो उस राह लकीरों के रुख़ खुद ब खुद बदल … more →
mehhekk wrote 1 year ago: लकीरें माना ये हाथों की लकीरों ने किस्मत के राज़ छुपाए शातिर है वो,ज़िंदगी के पूरे मोहरे तुम्हे नही … more →
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