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	<title>benjir &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/benjir/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "benjir"</description>
	<pubDate>Wed, 09 Jul 2008 13:01:45 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[जो समझ में आया वही लिख दिया-आलेख ]]></title>
<link>http://deepakbapukahin.wordpress.com/?p=521</link>
<pubDate>Fri, 09 May 2008 15:21:14 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakbapukahin.wordpress.com/?p=521</guid>
<description><![CDATA[मेरे मित्र और उड़न तश्तरी ब्लाग के लेख]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे मित्र और उड़न तश्तरी ब्लाग के लेखक श्री समीर लाल वाकई हिंदी ब्लाग जगत के उत्थान के लिए प्रयत्नशील हैं इसमें कोई संदेह नहीं है। वह मेरे ब्लागों पर सबसे अधिक टिप्पणी रखने वाले व्यक्ति हैं और मैं हृदय में उनके प्रति आत्मीयता का भाव रखता हूं पर उसका प्रदर्शन करना मुझे ठीक नहीं लगता। उनकी टिप्पणियां आमतौर से संक्षिप्त और औपचारिक  होती हैं पर उससे अपने अंदर एक प्रसन्नता की लहर दौड़ती है। मैं यह लेख उनकी प्रशंसा या समीक्षा के लिये नहीं लिख रहा हूं बल्कि कल उनकी टिप्पणी में जिस तरह दूसरे ब्लाग और टिप्पणियां लिखने के लिये अभियान चलाने की बात कही है उसी परिप्रेक्ष्य में मेरे मस्तिष्क में कुछ विचार आये जो शायद अलग प्रतीत हों पर  उनको रखना जरूरी समझता हूं। </p>
<p>श्री समीरलाल जी ने हिंदी में ब्लाग बढ़ाने तथा उन पर टिप्पणियां लिखने  की बात कहीं है वह मेरे अभियान का एक भाग है पर मैं हिंदी ब्लाग जगत लिये पाठक जुटाने के अभियान को भी कम वरीयता नहीं देता।  हिंदी ब्लाग में निराशाजनक स्थिति को मैं भी अनुभव करता हूं पर इसके लिये पाठकों की कमी भी एक महत्वपूर्ण पक्ष है। अंतर्जाल  हिंदी ब्लाग के लिये पाठकों की संख्या नगण्य है। इसलिये अनेक ब्लाग लेखक केवल हिंदी के ब्लाग सभी एक जगह दिखाने वाले एग्रीगेटरों पर हिंट पाने के लिये लिखते हैं और वहां साहित्य सृजन जैसा वातावरण अभी नहीं बन पाया है। अनेक ब्लाग लेखक अपने पाठों में यह बात लिख चुके हैं कि वह लिखने तो आये थे साहित्य और यहां अब कुछ अन्य लिख रहे हैं। मैं उनका लिखा पढ़कर यह बात मानता भी हूं कि वह वाकई साहित्य लिखते होंगे। देव और कृतिदेव फोंट में टाईप करने वाले अनेक लेखक यूनिकोड में लिखते हुए ब्लाग पर आये तो स्वयं मूल स्वरूप खो बैठे जिनमें मैं भी स्वयं भी शामिल हूं। अब देव और कृतिदेव को यूनिकोड मेंे बदलने वाला टूल आया है तब अनेक लोग खुश हुए क्योंकि उनको लगा कि वह अब पहले से अच्छे परिणाम निकाल सकते हैं। आज इतना बड़ा लेख लिखने का साहस मेरे अंदर केवल इसीलिये आया क्योंकि  सीधे कृतिदेव में लिख रहा हूं और यह टूल आये अभी अधिक वक्त नहीं हुआ। ऐसे में मुझे विश्वास है कि आगे और ब्लाग लेखक बेहतर लिखकर लेखक जुटाने का प्रयास करेंगे। इस समय जो हिंदी ब्लाग जगत पर लिखा जा रहा है उस पर दृष्टिपात किये बिना हम अगर किसी अभियान पर निकलेंगे तो शायद वहीं होंगे जहां अभी हैं। </p>
<p>शुरूआती दिनों में मैंने भी एग्रेगेटरों पर हिट पाने के लिये ऐसी पोस्टें लिखीं पर मुझे ध्यान आया कि एक लेखक के लिये अपने पाठकों की संख्या बढ़ाने वाले  व्यापक आधार वाले विषयों पर लिखना आवश्यक है। मैने हास्य कविताएं, आलेख, हास्य व्यंग्य, कहानियां, लघु कथाएं बहुत कठिनाई से यूनिकोड में लिखीं पर एग्रीगेटरों पर उनके हिट ने मुझे निराश किया।  फिर भी मैं आगे बढ़ता रहा यह सोचकर कि देखा जायेगा कि आगे क्या होता है? ब्लाग लेखक साथी हो सकते हैं पाठक नहीं यह बात मुझे अपने बढ़ते पाठक देखकर बहुत बाद में समझ आयी। तब मैंने तय किया कि अब आम पाठक को लक्ष्य कर लिखना चाहिए। फिर यह भी देखा कि मेरे ब्लाग पर आने वाला पाठक अन्य ब्लाग भी देखे ताकि वह अधिक से अधिक हिंदी भाषा के ब्लागों से परिचित हो सके इसलिये मैंने दूसरे ब्लाग लेखकों के भी ब्लाग लिंक किये ताकि अगर पाठक मुझसे  असंतुष्ट हो तो वह दूसरे का ब्लाग लेखकों  का लिखा पढ़कर वह यह समझ सके कि अंतर्जाल पर हिंदी में लिखने वाले भी कम नहीं है। यह मैने बहुत देर से किया फिर भी मेरे ब्लाग दूसरे ब्लागों  पर पाठक भेजते हैं। यह मैं बीस हजार की पाठक संख्या पार करने वाले ब्लाग की सूचनाओं में बता चुका हूं। उसमें यह भी बता चुका हूं कि किस तरह लोग जहां हास्य की सामग्री देखते ही  झपट पड़ते हैं। उसमें ‘हंसते रहो’ और ‘ठहाका’ ब्लाग को अधिक संख्या में मेरे ब्लाग से पाठक मिलना इसी बात का प्रमाण हैं। मेरे  ब्लाग से उड़न तश्तरी ब्लाग पर  भी पाठक जाते हैं और श्रीसमीरलाल जी के पास कोई काउंटर हो तो वह इसे देख सकते हैं। मैं श्रीसमीरलाल को बहुत पसंद करता हूं पर मेरे अज्ञात पाठक मेरी इस राय को नहीं जानते इसलिये उड़न तश्तरी के बाद लिंक किये गये ब्लागों पर अधिक गये-केवल इसलिये ही न कि  उसका नाम वहां किसी हास्य सामग्री होने का संदेश नहीं देता।<br />
केवल  नये ब्लाग बनवाने और टिप्पणियां लिखने से हिंदी ब्लाग जगत के लाभ की मैं संभावना नहीं देखता। सबसे बड़ी बात यह है कि विषय भी आम पाठक से सरोकार रखने वाला होना चाहिए। इस हिंदी ब्लाग जगत में मेरे कुछ मित्र हैं जो हमेशा ही कमेंट देते हैं और कुछ ब्लाग लेखक जब कोई जोरदार विषय होता है तो इस बात की परवाह नहीं करते कि मैंने उनको कभी टिप्पणी दी कि नहीं वह लिख जाते हैं।<br />
श्री समीरलाल जी अकेले ऐसे ब्लाग लेखक हैं जो ब्लाग से हटकर लिखे गये विषयों पर भी बहुत सारी टिप्पणियां प्राप्त कर लेते हैं पर इसका श्रेय उनके मधुर व्यवहार को जाता  है और टिप्पणियां तो इतनी करते हैं कि मैं भी सोचता हूं कि  यह व्यक्ति अगर ऐसा न करे तो मैं लिखूंगा कि नहीं। वह बहुत अच्छा लिखते हैं पर इतनी सारी हिट दिलाने के लिये यह अकेला कारण नहीं है। </p>
<p>        इस अंतर्जाल पर जो ब्लाग लेखक लंबे समय तक  लिखना चाहते हैं उनको सोचना अंतर्मुखी होगा पर लिखना बहिर्मुखी होगा। मेरे दिमाग में कुछ विचार हैं जो इस प्रकार हैं।</p>
<p>(1) अपने ब्लाग पर दूसरे के ब्लाग को भी लिंक दे। अकेले सफलता पाने का का विचार त्याग दें। कोई हमारा मित्र है या नियमित रूप से टिप्पणी करने वाला ब्लाग लेखक  तो लिंक दें अच्छी बात है पर यह भी देखें कि क्या कोई ऐसे ब्लाग लेखक भी हैं जो आपको कमेंट नहीं देते पर उनकी सामग्री पठनीय है तो उसे भी लिंक दें। हो सकता है उसकी वजह से  आपका ब्लाग पढ़ने आम पाठक आये क्योंकि वह सोचेगा कि यह आपके ब्लाग में लगा ब्लाग है वह ऊपर उसका पता थोड़े ही देखता है। मेरे मित्र उड़न तश्तरी और ममता श्रीवास्तव को पढ़ते हैं पर वह जाते मेरे ही ब्लाग से ही हैं-उनके ब्लाग का कोई अपने कंप्यूटर पर पता नहीं रखता।  हो सकता है कोई ऐसे भी लोग हैं जो मेरे ब्लाग पर इसलिये आते हों कि किसी दूसरे ब्लाग लेखक का ब्लाग मेरे ब्लाग से चिपका समझते होंं। जब तक नारद अभिव्यक्ति  पत्रिका से लिंक था मैं वहीं से उस पर जाता था-हो सकता है कि कुछ पाठक मेरे जैसे ही हों। अगर कोई अच्छा लिखने वाला ब्लाग लेखक है तो बिना किसी पूर्वाग्रह के उसका ब्लाग लिंक करें। इसके लिये आपको सभी ब्लाग पढ़ना पढ़ेंगे।<br />
(2)ब्लाग लेखकों को ऐसे विषयों पर ही ध्यान देना चाहिए जो सार्वजनिक हों। अगर कोई समाचार दे रहें हैं तो उसके साथ एक संपादक के रूप में भी विचार व्यक्त करें। याद रखिये जो आम पाठक यहां आते हैं वह उस ब्लाग लेखक की मौलिकता देखना चाहते हैं। महापुरुषों के संदेश लिखने वाली पोस्टों पर अनेक लोगों ने टिप्पणी लिखी थी कि अगर आप इनके साथ अपने विचार रखते तो बहुत अच्छा होता।<br />
(3)अपनी पोस्ट के साथ अधिकतम श्रेणियां रखें। कभी-कभी अंग्रेजी में भी टिप्पणियां रखें। हमारा  ब्लाग अंग्रेजी वालें भी पढ़ें यह तो चाहते हैं पर इस बात का ध्यान नहीं रखते कि अंग्रेजी वाले वहां कैसे आयेंगे। इसके अलावा अंग्रेजी शब्दों से भी हिंदी पाठक ब्लाग पर आते हैं<br />
(4)आलेख, निबंध, कविता, हास्य कविता, व्यंग्य और कहानी जैसे शब्द शीर्षक में लिख दें तो बढिया। मेरी वही हास्य कविताएं लोग पढ़ रहे हैं जिन पर मैंने ऊपर ही लिख दिया है।<br />
मैं जैसा हूं सबके सामने हैं। एग्रीगेटरों पर मैं हिट नहीं पाता यह सच है पर मुझे लगता है कि आम पाठकों का कुछ रुझान मेरी तरफ है। आम पाठकों की बात तो मैं ही लिखता हूं बाकी तो कोई नहीं बताता कि उसकी तरफ कैसा रुझान है? यह सबसे महत्वपूर्ण है। एग्रीगेटरों पर अनेक ब्लाग लेखकों से मित्रता मेरे लिए एक बोनस है क्योंकि मेरा मुख्य लक्ष्य पाठकों तक पहुंचना है। अभी सफलता दूर है पर मैंने भी ऐसा क्या लिख दिया है कि उछलता फिरूं। सच तो यह है कि कृतिदेव का यूनिकोड टूल मिलने के बाद तो मैंने सहज भाव से लिखना शुरू किया है और मैं जानता हूं कि यह सफलता अकेले चलने से नहीं मिलेगी इसलिये चाहता हूं कि अन्य ब्लाग लेखक भारी सफलता पायेंगे तो कुछ मेरे हिस्से में भी आयेगी। आखिरी बात यह है कि मैं कोई सिद्ध व्यक्ति नहीं हूं जो यह कहूं कि जो मैने लिखा है वही सही है। जो अनुभव किया वही लिख रहा हूं और हो सकता है कई इससे सहमत न हों और इसकी संभावना रहेगी भी क्योंकि ब्लागवाणी के हिट इस बात का प्रमाण है कि मेरे हाथ से कोई हिट पोस्ट नहीं निकली। वैसे भी मैं अपने कंप्यूटर की समस्याओं से एक महीने से परेशान हूँ और इधर कही बिजली तो कभी आंधी मेरी पोस्ट को रोक देती हैं।शेष फिर कभी	</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कमरे के अंदर-बाहर की राजनीति होती हैं अलग-अलग-हास्य कविता]]></title>
<link>http://deepakbapukahin.wordpress.com/?p=513</link>
<pubDate>Wed, 16 Apr 2008 16:06:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakbapukahin.wordpress.com/?p=513</guid>
<description><![CDATA[सभाकक्ष से बाहर निकलते ही
फंदेबाज जोर ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color:#003300;">सभाकक्ष से बाहर निकलते ही<br />
फंदेबाज जोर से चिल्लाया<br />
‘‘दीपक बापू, तुम्हें तो<br />
मैं बहुत भला आदमी समझा था<br />
पर तुम तो निकले एकदम चालू<br />
अपने मजदूरों के वेतन और बोनस<br />
बढ़ाने के लिये प्रबंधकों का पास तुम्हें लाया<br />
मै उनका अध्यक्ष हूं और तुम मित्र<br />
ढंग से हमारी बात कहोगे<br />
यही सोच तुम्हें बुलाया<br />
पर तुमने कंपनी से अपने ठेके के रेट बढ़ाये<br />
मेरे लिये भी कुछ लाभ जुटाये<br />
पर जिन मजदूरों की बात करने गये थे<br />
उस पर तो हम बोल ही न पाये<br />
बताओं अब क्या मूंह लेकर<br />
साथियों के पास जाऊं<br />
यह तुमने केसा हमको फंसाया ’’</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">गला खंखार कर मुस्कराते हुए बोले<br />
‘‘चलो चलते हैं पहले वहां होटल में<br />
जहां खाने की पर्ची  तुम्हारे प्रबंधन ने दी है<br />
फिर समझाते हैं तुम्हें माजरा<br />
राजनीति करने चले हो या<br />
खरीदने ज्वार बाजरा<br />
हम न तीन में  न तेरह में<br />
न अटे में न फटे में<br />
हम तो तुम्हारे वफादार हैं<br />
मजदूरों के हिमायती है हम भी<br />
पर राजनीति तो तुम्हारी चमकानी है<br />
कमरे के अंदर<br />
बाहर होती है राजनीति अलग-अलग<br />
एक समझना बात बचकानी है<br />
हमार ठेके के रेट तो वैसे ही बढ़ते<br />
पर तुम कभी राजनीति की सीढ़ी नहीं चढ़ते<br />
अरे, जाकर मजदूरों को<br />
आश्वासन मिलने की बात बता देना<br />
वहां कर रहे थे हम दोनों हुजूर-हुजूर प्रबंधन की<br />
पर मजदूरों में हाय-हाय करा देना<br />
कुछ तालियां हमारे नाम की बजवा देना<br />
अपने दो-चार चमचों को भी<br />
प्रमोशन दिलवा देना<br />
पर असली हक की लड़ाई कभी न लड़ना<br />
तुम्हारे बूते का नहीं है यह सब<br />
निकल गया हाथ से मामला तो<br />
फिर मुश्किल होगा पकड़ना<br />
वाद और नारों पर चलना सालों साल<br />
भरना अपने घर में माल<br />
हमारी तरह गहरा चिंतन न करना<br />
हम तो हैं सब जगह फ्लाप<br />
और अब तो हिट की फिक्र छोड़ दी है<br />
पर राजनीति में तुम्हें हिट होने के लिये<br />
ऐसा ही मायाजाल है रचना<br />
कमरे के बाहर हाय-हाय<br />
अंदर उनको हुजूर-हुजूर करना<br />
अब सब जगह ऐसा ही वक्त आया<br />
कोई तुम्हें कुछ नहीं कहेगा<br />
पूरा जमाना इसी रास्त चलता आया<br />
...............................................</span></strong></p>
<p><strong><span style="color:#003300;">सूचना-यह काल्पनिक हास्य व्यंग्य रचना है और किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई मेल नहीं है अगर किसी की कारिस्तानी से मेल खा जाये तो वही उसके लिये जिम्मेदार होगा।</span></strong></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पूरब की बेटी -बेनजीर]]></title>
<link>http://mehhekk.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b0/</link>
<pubDate>Fri, 28 Dec 2007 16:20:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>mehhekk</dc:creator>
<guid>http://mehhekk.wordpress.com/2007/12/28/%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b0/</guid>
<description><![CDATA[पूरब की बेटी -बेनजीर
पूरब की एक बेटी ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><span>पूरब</span><span> </span><span>की</span><span> </span><span>बेटी</span><span> -</span><span>बेन</span><span>जीर</span></p>
<p><span>पूरब</span><span> </span><span>की</span><span> </span><span>एक</span><span> </span><span>बेटी</span><span> </span><span>थी</span><br />
<span>हर</span><span> </span><span>निर्णय</span><span> </span><span>सोच</span><span> </span><span>के</span><span> </span><span>देती</span><span> </span><span>थी</span><br />
<span>चाहती</span><span> </span><span>नयी</span><span> </span><span>दुनिया</span><span> </span><span>बनाना</span><br />
<span>देस</span><span> </span><span>में</span><span> </span><span>अपने</span><span> </span><span>लोकतंत्र</span><span> </span><span>लाना</span><br />
<span>जीजान</span><span> </span><span>से</span><span> </span><span>ल</span><span>ढी</span><span> </span><span>ल</span><span>ढाई</span><br />
<span>हिम्मत</span><span> </span><span>से</span><span> </span><span>की</span><span> </span><span>चढ़ाई</span><br />
<span>ख़ुद</span><span> </span><span>के</span><span> </span><span>बलबूते</span><span> </span><span>पर</span><span> </span><span>बनी</span><span> </span><span>पन्तप्रधान</span><br />
<span>लाखो</span><span> </span><span>दिलो</span><span> </span><span>में</span><span> </span><span>उन्होने</span><span> </span><span>पाया</span><span> </span><span>स्थान</span><br />
<span>क</span><span>न</span><span>खर</span><span> </span><span>थे</span><span> </span><span>उनके</span><span> </span><span>विचार</span><br />
<span>उतने</span><span> </span><span>ही</span><span> </span><span>सादे</span><span> </span><span>आचार</span><br />
<span>नही</span><span> </span><span>कभी</span><span> </span><span>बढ़चढ़ा</span><span> </span><span>कर</span><span> </span><span>किया</span><span> </span><span>प्रचार</span><br />
<span>सदैव</span><span> </span><span>सदाचार</span><span> </span><span>का</span><span> </span><span>किया</span><span> </span><span>प्रसार</span><br />
<span>अपने</span><span> </span><span>बच्चो</span><span> </span><span>का</span><span> </span><span>भी</span><span> </span><span>सदा</span><span> </span><span>सोचती</span><br />
<span>उनका</span><span> </span><span> </span><span>फूलो</span><span> </span><span>सा</span><span> </span><span>ख़याल</span><span> </span><span>रखती</span><br />
<span>अपनी</span><span> </span><span>सारी</span><span> </span><span>ममता</span><span> </span><span>लुटाती</span><br />
<span>कही</span><span> </span><span>से</span><span> </span><span>आतंकवाद</span><span> </span><span>का</span><span> </span><span>शैतान</span><span> </span><span>आया</span><br />
<span>जहाँ</span><span> </span><span>का</span><span> </span><span>एक</span><span> </span><span>दीप</span><span> </span><span>बुझाया</span><br />
<span>कैसे</span><span> </span><span>उसके</span><span> </span><span>हाथ</span><span> </span><span>ना</span><span> </span><span>कापे</span><br />
<span>जब</span><span> </span><span>एक</span><span> </span><span>गुलशन</span><span> </span><span>को</span><span> </span><span>जला</span><span>या</span><br />
<span>खुदा</span><span> </span><span>का</span><span> </span><span>भी</span><span> </span><span>कैसा</span><span> </span><span>रिवाज़</span><span> </span><span>है</span><br />
<span>सच्चे</span><span> </span><span>इंसान</span><span> </span><span>को</span><span> </span><span>पास</span><span> </span><span>बुलाया</span><br />
<span>नयनो</span><span> </span><span>में</span><span> </span><span>बचे</span><span> </span><span>सूखे</span><span> </span><span>अश्क</span><br />
<span>उनकी</span><span> </span><span>याद</span><span> </span><span>में</span><span> </span><span>अर्पन</span><span> </span><span>ये</span><span> </span><span>पुष्प</span><br />
<span>चाँद</span><span> </span><span>थी</span><span> </span><span>सबका</span><span> </span><span>दुलारा</span><br />
<span>बन</span><span> </span><span>गयी</span><span> </span><span> </span><span>चमकता</span><span> </span><span>सितारा</span><br />
<span>हर</span><span> </span><span>दिल</span><span> </span><span>में</span><span> </span><span>रहेगा</span><span> </span><span>उनका</span><span> </span><span>नू</span><span>र</span><br />
<span>अनमोल</span><span> </span><span>बेनजीर</span><span> </span><span>नामक</span><span> </span><span>कोहिनूर</span><span>.</span></p>
<p><span>top post</span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[बेनजीर की हत्या:पाकिस्तान का भविष्य भी दाव पर]]></title>
<link>http://deepakbapukahin.wordpress.com/2007/12/28/bejir-ki-hatyapakistan-ka-bhavisya-bhee-daav-par/</link>
<pubDate>Thu, 27 Dec 2007 16:43:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakbapukahin.wordpress.com/2007/12/28/bejir-ki-hatyapakistan-ka-bhavisya-bhee-daav-par/</guid>
<description><![CDATA[आखिर आतंकवादियों ने बेनजीर को मौत की न]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>आखिर आतंकवादियों ने बेनजीर को मौत की नींद सुला दिया। एक मासूम औरत जो अपने देश के लोगों के लिए लोकतंत्र की रौशनी जलाना चाहती थी उसे मार डाला। आखिर एक मासूम औरत को मारकर क्या पाया? एक शिक्षित और सुन्दर जिस्म की मालिक औरत को मारकर चंद दिनों के लिए सुर्खियों में रहेंगे और अपने आकाओं  से कुछ तोहफे पाकर फिर और हत्याओं में जुट जायेंगे।</p>
<p>क्या बात इतनी है? नहीं! वह एक ऐसी औरत है जो मर्दों के चंगुल में फंसी इस दुनिया में उनकी राजनीति का शिकार बनी। वह अगर देश की प्रधानमंत्री बनतीं  तो उससे किसको ख़तरा था- और जिसे था वही उनका दुश्मन है। कुछ तत्काल विचार ख्याल आते हैं।</p>
<p><strong>क्या पश्चिमी  देश वाकई पाकिस्तान में लोकतंत्र चाहते हैं? </strong></p>
<p>उत्तर-नहीं! पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं जिसे वहाँ के लोकतांत्रिक नेता संभाल पायेंगे इसका उन देशों को यकीन नहीं है। मुशर्रफ अभी भी उनकी  जरूरत है। और बेनजीर प्रधानमंत्री बनतीं तो अधिकारों को लेकर उनसे संघर्ष होता। विश्व का तमाम  तरह से दबाव था और  इसलिए पश्चिमी देशों ने वहाँ लोकतंत्र की बहाली के नाटक के लिए बेनजीर को वहाँ भेजा तो मुस्लिम राष्ट्र भी पीछे  नहीं  रहे  उन्होने अपने समर्थक   नवाज शरीफ  को वहाँ भेजा-बेनजीर एक महिला थी और उसका पाकिस्तान का प्रधानमंत्री इतनी आसानी से बनना स्वीकार्य नहीं था और चाहते थे  कोई उनका बड़ा समर्थक भी वहाँ की राजनीति में बना रहे। </p>
<p>पश्चिमी राष्ट्रों की हमदर्दी केवल अपने हितों से होती है और एशिया में तो महिला और या पुरुष उनको किसी से कोई सहानुभूति नहीं होती। बेनजीर अब नहीं रही तो हो सकता है कि चुनाव ही न हों और हों तो परिणाम ऐसे आयें कि मुशर्रफ की ताकत जस की तस ही रहे। यही पश्चिमी राष्ट्र चाहते हैं। अगर बेनजीर बाहर रहतीं और चुनाव होते तो उनको विश्व में इतनी मान्यता नहीं मिल पाती जितना उनके पाकिस्तान में रहते मिलती और अब तो नहीं रहीं तो फिर भी मान्यता तो रहेगी। बेनजीर के बाहर जीवित रहते हुए चुनाव केवल नाटक माने जाते पर पाकिस्तान आयीं तो लोकतंत्र की वापसी होती लगी। उनका काम बस यहीं तक ही था। अब फिर वही होने वाला है। पाकिस्तान में सरकार का सुप्रीमो अब वही होगा जो मुशर्रफ का रबड़ स्टांप होगा। अगर बेनजीर नहीं है तो नवाज शरीफ की भी स्थिति कोई अच्छी नहीं रहने वाली है। इस तरह सब के हित  पूरे हो गए।  मुशर्रफ का खेल अभी और चलेगा। पश्चिमी राष्ट्रों की मुख्य चिंता पाकिस्तान के परमाणु अस्त्र हैं। भारत के सामने एक ताकतवर शत्रु रहे अपनी इसे नीयत के चलते वह उसका परमाणु भण्डार नष्ट भी नहीं करवा सकते।  </p>
<p>मगर पश्चिमी देशों की गलतफहमी है कि पाकिस्तान अभी भी भारत को रोकने के लिए उनका हथियार है। ऐसा लगता है कि उसका सही आंकलन नहीं कर रहा। जिस तरह वहाँ आत्मघाती हमलावरों की बाढ़ आयी हुई है उससे नहीं लगता कि पाकिस्तान बच पाएगा। रावलपिंडी में पाकिस्तान का मुख्यालय है और कहने वाले तो यह भी कहते हैं कि सबसे अधिक आतंकवादी ताक़तवर  वहीं है। बाहर के लोग नहीं पाकिस्तान के लोग ही आतंकवादियों और प्रशासन में मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं। पाकिस्तान एक देश है यह गलतफहमी भी नहीं पालना चाहिए क्योंकि पंजाब के अलावा और बाकी सूबों में उसके लिए कोई सदभावना नहीं है। वह भारत नहीं है जिसके हर प्रांत में देशभक्ति की भावना है, बल्कि भाषा और अन्य आधारों पर वहाँ जितने विभाजन हैं उनको पाटने की वहाँ के नेताओं ने कभी कोशिश नहीं की। बेनजीर की हत्या के परिणाम क्या होंगे यह तो वक्त बताएगा पर अब एक बात तय हो गई है कि पाकिस्तान में मुशर्रफ के बाद उसका कोई भविष्य नहीं है। अब तो पाकिस्तान और आतंकवाद सहअस्तित्व के सिद्धांत पा टिके हुए हैं. एक नहीं दोनों साथ जायेंगे. अब पश्चिमी राष्ट्र को अपनी रणनीति पर फिर विचार करना होगा, नहीं तो यह मुसीबत उन पर ही आने वाली है.       </p>
]]></content:encoded>
</item>

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