Blogs about: Bhaarat

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कन्या भ्रुण हत्या से मध्ययुगीन स्थिति की तरफ बढ़ता समाज-हिन्दी लेख (kanya bhrun hatya aur madhya yugin samaj-hindi lekh22 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:               हो सकता है कि कुछ लोग हमारी बुद्धि पर ही संशय करें, पर इतना तय है कि जब देश के बुद्धिज … more →

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विरह का दर्द और हास्य का जाल-हिन्दी हास्य कविता (virah ka dard aur hasya ka jaal-hindi hasya kavita)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पुरानी प्रेमिका मिली अपने पुराने प्रेमी कवि से बहुत दिनों बाद और बोली, ‘कहो क्या हाल हैं, तुम्हारी क … more →

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वैश्विक उदारीकरण-हिन्दी व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: वैश्विक उदारीकरण के चलते बाज़ार एक हो गया है, सभी को खुश करते सौदागरों ने सजा दिये हैं बुत कहीं धर्म … more →

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शहर भर की पहरेदारी-हिन्दी व्यंग्य कवितायें

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: खज़ाने की चाब़ी ठगों के हाथ में देकर मालिक अब बेफिक्र हो गये हैं, हेराफेरी में हाथ काले नहीं होंगे मि … more →

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अन्न की तरह धन पचने का भी मंत्र हो तो अच्छा-हिंदी हास्य व्यंग्य (hasya vyangya in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: उस दिन एक संत को हमने पेट में अन्न पचाने का मंत्र बताते हुए सुना। वह सुबह, दोपहर और रात को भोजन करने … more →

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विदुर दर्शन-सात्विक कार्य सिद्ध न हो भी चिंता नहीं1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: मिथ्यापेतानि कर्माण सिध्येवुर्यानि भारत। अनुपायवुक्तानि मा स्म तेष मनः कृथाः।। हिंदी में भावार्थ-मिथ … more →

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बुतों का बाजार-हास्य व्यंग्य कविता (buton ka bazar-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: चौराहे पर खड़े पत्थर के बुत पर कंकड़ लगने पर भी लोग भड़क जाते हैं। अगला निशाना खुद होंगे यह भय सताता है … more →

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वह औरत-कविता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: दिन भर ईंट, पत्थर और सीमेंट का मसाला-तस्सल सिर पर रखकर ढोती वह औरत रात्रि में प्लास्टिक की छत से ढंक … more →

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मै अखबार आज भी क्यों पढ़ता हूं-हास्य व्यंग्य2 comments

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago:           मैने अखबार पढ़ना बचपन से ही शुरू किया क्योंकि मोहल्ले का वाचनालय हमारे किराये के घर के पास … more →

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समूह और वर्ग होते हैं भ्रम का प्रतीक

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago:                        समाज को बांटकर विकास करने का सिद्धांत मुझे कभी नहीं सुहाता। मुझे उकताहट होती … more →

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शैतान के सम्मान की माया-हास्य कविता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: साधू के आश्रम में पहुंचकर शैतान ने अपनी चाल का जाल बिछाया उसके सब चेलों को अलग-अलग बुलाकर ‘सर् … more →

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रहीम के दोहे: बिपति भए धन न रहे

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: बिपति भए धन न रहे, रहे जो लाख करोड़ नभ तारे छिपि जात है, ज्यों रहीम भए भोर कवि रहीम कहते हैं, जैसे प … more →

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धोनी कप्तान की तरह पेश आये

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: एक दिवसीय मैचों के श्रंखला में आस्ट्रेलिया ने भारत को अभी मैचों में हराकर यह सिद्ध कर दिया है कि अभी … more →

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धोनी कप्तान की तरह पेश आयें

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: एक दिवसीय मैचों के श्रंखला में आस्ट्रेलिया ने भारत को अभी दो मैचों में हराकर यह सिद्ध कर दिया है कि … more →

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चाणक्य नीति:भावना से प्रतिमा में भी भगवान्

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: 1.मन की शुद्ध भावना से यदि लकड़ी, पत्थर या किसी धातु से बनी मूर्ति की पूजा की जायेगी तो सब में व्याप् … more →

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कबीर वाणी:उसी धन का संचय करो जो आगे काम आये

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: ‘कबीर’ मन फूल्या फिरै,करता हूँ मैं प्रेम कोटि क्रम सिरि ते चल्या, चेत न देखै भ्रम संत शि … more →

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गरीबों के नाम बडे,दर्शन छोटे

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: एक टीवी चैनल पर प्याज के बढती कीमतों पर लोगों के इन्टरव्यू आ रहे थे, और चूंकि उसमें सारा फोकस मुंबई … more →

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हास्य कविता -क्रिकेट तो अनिश्चतताओं का खेल है

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: पांच दिन से एक दिन अब क्रिकेट खेल के रह गये बीस ओवर बाजार में देश प्रेम की भावनाओं का भुनाते ख़ूब चल … more →

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