त्रिवेणी 1.समय भागता रहा अपनी रफ़्तार से कुछ पाने की जिद्द थी मैं भी भागती रही खुद को ही बहुत अजनबी महसूस कर रही हूँ 2.हाथियों जितनी बड़ी खुरसियाँ बना कर निरक्षर नेता बैठे उस पर और पूरे देश का झूलुस … more →
mehekpryas wrote 2 months ago: तीनों लोकों में राधा की स्तुति से देवर्षि नारद खीझ गए थे। उनकी शिकायत थी कि वह तो कृष्ण से अथाह प्रे … more →
pryas wrote 1 year ago: एक संत ने एक रात स्वप्न देखा कि उनके पास एक देवदूत आया है। देवदूत के हाथ में एक सूची है। उसने कहा, … more →
pryas wrote 1 year ago: तुम नभ हो, मेघ हो, गर्जन हो, तुम धरती पर व्याप्त शक्ति, प्रजनन हो. तुम आग हो, शीतल हो, पानी हो, इस ज … more →
mehhekk wrote 1 year ago: त्रिवेणी 1.समय भागता रहा अपनी रफ़्तार से कुछ पाने की जिद्द थी मैं भी भागती रही खुद को ही बहुत अजनबी … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मंदिर होये मूरत,हृदय बसे भगवन ये छोटिसी कहानी हमारी मा काफ़ी बार हम सारे भाई बहनो को दोहराती रहती है … more →
mehhekk wrote 2 years ago: उठो उठो गोपाला पूरब में अरुण रथ आया ,लेकर किरनो का उजाला भोर हुई अब , उठो उठो गोपाला, मेरे नंदलला | … more →
mehhekk wrote 2 years ago: मन मेरा नीत चपल चंचल ईत उत हर पल भटकन तेरे चरण,शरण आई प्रभुजी रखियो मन तेरे जाप मा अटकन बिनती इतनी ल … more →