mehhekk wrote 1 year ago: मुक्ति 1. भोर की लालिमा मन में असीम भक्ति हाथों में पूजा थाल तुलसी की परिक्रमा मंत्रो … more →
mehhekk wrote 1 year ago: यमुना के तट पर गोपियों का जमघट वस्त्राभूषण रख कर जलक्रीड़ा करती सब. नटखट कान्हा आए छुपता दबे पाव तब … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हम सब बंधे हुए है एक न दिखाई देनेवाले छोर से हम महसूस करते है,मानते है आत्मा में उनका निवास है सुख ह … more →