bharateeya wrote 1 week ago: भक्तः सूरदासः (१४७८-१५८१ CE) भक्तः कः इत्यस्य नूतनमेकं व्याख्यानं मया अधुना श्रुतम् – “य … more →
santoshjalanpink wrote 3 months ago: सारी दुनिया से हार भगवन आया तुम्हरे द्वार नैया पार लगाओ जी तेरा सहारा न मिले तो जीवन है बेकार ते … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मुक्ति 1. भोर की लालिमा मन में असीम भक्ति हाथों में पूजा थाल तुलसी की परिक्रमा मंत्रो क … more →
mehhekk wrote 1 year ago: यमुना के तट पर गोपियों का जमघट वस्त्राभूषण रख कर जलक्रीड़ा करती सब. नटखट कान्हा आए छुपता दबे पाव तब … more →
mehhekk wrote 2 years ago: हम सब बंधे हुए है एक न दिखाई देनेवाले छोर से हम महसूस करते है,मानते है आत्मा में उनका निवास है सुख ह … more →