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Blogs about: Bharat

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ज़िंदगी और परदे का सच-हिंदी व्यंग्य कविताएँ (zindagi aur parde ka sach-hindi vyangya kavitaen)

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago:  इस देश का आदमी उड़ना चाहता है ऊंची उड़ान अपने पांवों में पुरानी ज़जीरों को बांधकर. अपनी आँखों स … more →

Tags: arebic, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, कला

वादा और इंतजार-व्यंग्य कविता (vada aur intzar-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: गिला शिकवा खूब किया दिन भर पूरे जमाने का फिर भी दिल साफ हुआ नहीं। इतने अल्फाज मुफ्त में खर्च किये फि … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

हमदर्दी कला-व्यंग्य कविता (art of sypothy)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम

प्रजातंत्र में ब्लॉग की महत्वपूर्ण भूमिका-हिंदी लेख (democracy and hindi blog-hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की संख्या सात करोड़ से ऊपर है-इसका सही अनुमान कोई नहीं दे रहा। कई लोग इस … more →

Tags: Anubhuti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, साहित्य

समाज को नकली नायकों के महिमा मंडन बचना होगा-चिंत्तन आलेख (nakali naykon ka mahim mandan-hindi lekh)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: भारतीय अध्यात्मिक ज्ञान में व्यक्ति को सदैव सकारात्मक सोच की प्रेरणा दी जाती है। इसके पीछे मुख्य कार … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, संपादकीय

मनुष्य बनाने की जरुरत-चिंतन आलेख (charitra aur manushya-chintan alekh)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: ऐसा नहीं लगता कि निकट भविष्य में जाति पाति, धर्म, भाषा, और क्षेत्र के आधार पर बने समूहों के आपसी विव … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चरित्र, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, दृष्टिकोण, मस्तराम, योग साधना

कौटिल्य दर्शन-दोस्त और दुश्मन दो प्रकार के होते हैं (kautilya darshan-dost aur dushman)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: सहज कार्यजश्वव द्विविधः शत्रु सच्यते। सहज स्वकुलोत्पन्न कार्यजः स्मृतः। हिंदी में भावार्थ-शत्रु दो प … more →

Tags: abhivyakti, adhyatm, alekh, arebic, Article, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन

भर्तृहरि नीति शतक-धन की ऊष्मा से रहित मनुष्य क्या रह जाता है (heat of money-hindu sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि  ————————— … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, अध्यात्म, editoriyal, Internet, dohe, सन्देश, अनुभूति

दूसरी किताब-हास्य व्यंग्य (doosri kitab- hindi hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: बुद्धिजीवियों का सम्मेलन हो रहा था। अनेक प्रकार के बुद्धिजीवियों को उसमें आमंत्रण दिया गया। यह सम्मे … more →

Tags: inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, अनुभूति, आलेख, हिंदी साहित्य, Internet, hindi thought

अन्न की तरह धन पचने का भी मंत्र हो तो अच्छा-हिंदी हास्य व्यंग्य (hasya vyangya in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: उस दिन एक संत को हमने पेट में अन्न पचाने का मंत्र बताते हुए सुना। वह सुबह, दोपहर और रात को भोजन करने … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, सूचना, हास्य व्यंग्य

गुलाम कर रहे राज़-त्रिपदम (gulam kar rahe raj-tripadam)

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: गुलाम राज कर रहे हैं यहां गुलाम पर। कोई छोटा है कोई उससे बड़ा यूं नाम भर। हुक्म चले नहीं पहुंचता है म … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, साहित्य, सृजन, हिन्दी

असली नकली पुरस्कार-हिंदी हास्य व्यंग्य (hindi comedy satire on prize)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: समाज सेवाध्यक्ष जी ने अपनी बाहें टेबल पर टिकाई अपना मूंह हथेलियों पर रखने को बाद अपने सात सभासदों की … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, इनाम, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भाषा

तुम वह समंदर बनना-हिंदी कविता (tum samandar banna-hindi kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सारे जहां की प्यास मिटा सको तुम वह समंदर बनना. भेजे जो आकाश में पानी भरकर मेघ जहां लोग पानी को तरसे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, समाज, सूचना, हंसना

मनु स्मृति-योग्य आदमी से अच्छे संबंध बनाएं (manu smriti-yogya admi)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते है कि ——————————— … more →

Tags: अध्यात्म, आलेख, कला, मनोरंजन, मस्तराम, समाज, हिन्दी, Chanakya, chankya

ऐसे ही अफसाने-हिंदी व्यंग्य कविता (bade log-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब बहता था दरिया में पानी तब भला कौन वादा करता था उसे लाने का। कहीं बांध बनाये कहीं रास्ता बदला पानी … more →

Tags: कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द

हिंदी अध्यात्म सन्देश-बुरे काम से दूर होकर ही अच्छाई समझना संभव (hindu adhyatm sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अर्थसिद्धि परामिच्छन् धर्ममेवादितश्चरेत्। न हि धर्मदपैत्यर्थः स्वर्गलोकादिवामृतम्।। हिंदी में भावार् … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, समाज, हिन्दी

शयों का रोज शक्ल बदलना-हिन्दी व्यंग्य कविता (shayon ka roop-vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जरुरतों की शयों का रोज शक्ल बदलना दौलत के पहाड़ पर इंसानों की चाहतों का चढ़ना तरक्की का यह पैमाना नहीं … more →

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शोर और शांति-हिन्दी कविता (shor aur shanti)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: शोर कर रही भीड़ में शांति कराने के लिये बहुत तेज आवाज में शोर मचाओगे तो तुम भी शांति के मसीहा हो जाओग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य

घर का रोना-हास्य व्यंग्य कविता (ghar ka rona-vyangya kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: छायागृह में चलचित्र के एक दृश्य में नायक घायल हो गया तो एक महिला दर्शक रोने लगी। तब पास में बैठी दूस … more →

Tags: arbic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, हास्य, हिंदी पत्रिका


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