क्या लेखक केवल लिखने के ही भूखे होते हैं? अधिकतर लोग शायद यही कहेंगे कि ‘हां’। यह बात नहीं है। सच तो यह लेखक को अपने लिखते समय तो मजा आता है पर लिखने के बाद फिर वह उसका मजा नहीं ले पाता। वह किसी का … more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 6 months ago: क्या लेखक केवल लिखने के ही भूखे होते हैं? अधिकतर लोग शायद यही कहेंगे कि ‘हां’। यह बात नहीं है। सच त … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन जगत बडाई की, कूकुर की पहिचानि प्रीती करे मुख छाती, बैर करे तन हानि कविवर रहीम कहते हैं की अपन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन लाख भली करो, अगुनी अगुन न जाय राग सुनत पय पियत हू, सांप सहज धरि खाय कविवर रहीम कहते हैं की अस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो रहीम करिबो हुतो, ब्रज को इहै हवाल तौ काहे कर धरुयो, गोवर्धन गोपाल कविवर रहीम कहते हैं कि श्रीक … more →
bharatkisan wrote 2 years ago: BharatKisan – Kheti, Kisan Bharat Aur Artha Vyavastha – Ek Sameeksha … more →