क्या लेखक केवल लिखने के ही भूखे होते हैं? अधिकतर लोग शायद यही कहेंगे कि ‘हां’। यह बात नहीं है। सच तो यह लेखक को अपने लिखते समय तो मजा आता है पर लिखने के बाद फिर वह उसका मजा नहीं ले पाता। वह किसी का दू… more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कभी शब्द नहीं बनता अकेला शब्द कभी भाषा नहीं बनता। कई मिलकर बनाते हैं एक भाव समूह जिससे उनका निज परिच … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: क्या लेखक केवल लिखने के ही भूखे होते हैं? अधिकतर लोग शायद यही कहेंगे कि ‘हां’। यह बात नहीं है। सच तो … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: रहिमन जगत बडाई की, कूकुर की पहिचानि प्रीती करे मुख छाती, बैर करे तन हानि कविवर रहीम कहते हैं की अपनी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: रहिमन लाख भली करो, अगुनी अगुन न जाय राग सुनत पय पियत हू, सांप सहज धरि खाय कविवर रहीम कहते हैं की असं … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जो रहीम करिबो हुतो, ब्रज को इहै हवाल तौ काहे कर धरुयो, गोवर्धन गोपाल कविवर रहीम कहते हैं कि श्रीकृष … more →
bharatkisan wrote 2 years ago: BharatKisan – Kheti, Kisan Bharat Aur Artha Vyavastha – Ek Sameeksha … more →