हाथों में उठाए काग़ज़ और क़लम लिख देते है दिल के जज़्बातों को खुद के ही अल्फ़ाज़ कभी पक्के ,कभी कच्चे से लगते है | कल्पनाओ को मन के नया रूप मिलता जी लेते है अपने उन सिमटे ख्वाबों को भावनाओ में ब… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: हाथों में उठाए काग़ज़ और क़लम लिख देते है दिल के जज़्बातों को खुद के ही अल्फ़ाज़ कभी पक्के ,कभ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मैं कविता लिखती हूँ लोगो ने मुझसे पूछा,तुम ऐसी कैसी हो बाहर से पिघला मक्खन,अंदर से मोम जैसी हो | … more →
mehhekk wrote 1 year ago: एहसास एक भावना,एक माध्यम है कुछ पाने और कुछ खोने का कभी ना कर सकी इस भावना का इज़हार और ना ही … more →