अन्त कायर का कायरों को वार नहीं झेलने पड़ते और इसलिए घाव न उनकी छाती पर होते हैं न पीठ पर उनका खून बाहर नहीं गिरता नसों में दौड़ता रहता है अलबत्ता मरते वक्त उन्हें खून की कै होती है । - भवानीप्रस… more →
यही है वह जगहअफ़लातून wrote 1 week ago: अन्त कायर का कायरों को वार नहीं झेलने पड़ते और इसलिए घाव न उनकी छाती पर होते हैं न पीठ पर उनका खून बा … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: [ स्वराज के बाद का भारत जिस प्रकार गांधी वाले रास्ते से विचलित हुआ उससे भवानी बाबू का हृदय हिल उठता … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: [ ‘भवानी प्रसाद मिश्र के आयाम’ , संपादक लक्ष्मण केड़िया,विशेषांक ‘समकालीन सृजन’ , २० बलमुकुंद मक्कर र … more →