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Blogs about: Bhruthari Shatak

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भर्तृहरि नीति शतक: धनी दोस्त से धन और दुर्जन से दया कि याचना न करें

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हाँ कि —————————— … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, अध्यात्म, Internet, dharm, bharat, साहित्य, Deepak bharatdeep

भर्तृहरि नीति शतक-भगवान ने दिया है मौन रहने का गुण

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————- स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, hindu, India, सन्देश

भर्तृहरि नीति शतक: कुत्ता हड्डी चबाते हुए इन्द्र देवता की परवाह नहीं करता

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————– कृमिकुलचितं लालाक्लिन् … more →

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भर्तृहरि शतकः कामदेव करते हैं इस विश्व में अद्भुत लीला1 comment

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: कृशः काणः खञ्ज श्रवणरहितः पुच्छविकलो व्रणी पूयक्लिनः कृमिकुलशतैरावुततनु क्षुधाक्षामो जीर्णः पिठरककाप … more →

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भर्तृहरि शतकः इच्छाओं की आग गुणों को जला देती है

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: तावन्महत्तवं पाण्डित्यं कुलीनत्वं विवेकता यावज्जवलति नांगेषु हतः पञ्वेषु पावकः हिंदी में भावार्थ-हृद … more →

Tags: Hindi Education, Hindi friends, Hindi online journalism, Hindi knowledge, Hindi writing, Hindu darshan, Hindu culture, hindi bharat, hindi india

भृतहरि शतकःसज्जन की मित्रता पूर्वाद्ध की छाया के समान

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दुर्जनः परिहर्तवयो विद्ययाऽलङ्कृतोऽपि सन् मणिनाः भूषितः सर्पः किमसौ न भयंकर इसका आशय यह है कि कोई दु … more →

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भृतहरि शतकःआजीविका कमाते हुए मनुष्य की जिंदगी चली जाती है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंसाशून्यमयत्नलभ्यमश्यनं धात्रा मरुत्कल्पितं व्यालानां पशवस्तृणांकुरभुजस्तुष्टाः स्थलीशायिनः संसारा … more →

Tags: आलेख, अध्यात्म, Kabir, hindu, dharm, Adhyaatm, dohe, धर्म, bharat

भृतहरि शतकःमनुष्य इच्छा और आशा के कारण नाचता है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: खलालापाः सोढा कथमपि तदाराश्र्चनपरैर्निगुह्मान्तर्वाष्पं हस्तिमपि शून्येन मनसा कृतश्चियत्तस्तम्भः प्र … more →

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भृतहरि शतक:स्त्री को अबला मानने वाले कवि विपरीत बुद्धि के

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नूनं हि ते कविवरा विपरीत वाचो ये नित्यमाहुरबला इति कामिनीनाम् । याभिर्विलालतर तारकदृष्टिपातैः शक्राय … more →

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भृतहरि शतकःकामदेव का शिकार हुए बिना युवावस्था निकल जाये तो धन्य समझें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: श्रृङगारद्रुमनीरदे प्रचुरतः क्रीडारसस्त्रोतसि प्रद्युम्नप्रियन्धवे चतुरवाङ्मुक्ताफलोदन्वति। तन्वीनेत … more →

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भृतहरि शतकःसंतोष से अमीर-गरीब समान हो जाते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वयमहि परितृष्टा वल्कलैस्त्वं दृकूलैस्सम इह परितोषो निर्विशेषो विशेषः। स तु भवतु यस्य तृष्णा विशाला म … more →

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भृतहरि शतक:आजीविका की खोज में आदमी के गुण व्यर्थ हो जाते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंसाशून्यमयत्नलभ्यमश्यनं धात्रा मरुत्कल्पितं व्यालानां पशवस्तृणांकुरभुजस्तुष्टाः स्थलीशायिनः संसारा … more →

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भृतहरि शतक:नौकर का धर्म निभाना होता है कठिन

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मौनान्मूकः प्रवचनपटूर्वातुलो जल्पको वा धृष्टः पाश्र्वे वसति च सदा दूरतश्र्चाऽप्रगल्भ क्षान्त्या भीरु … more →

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