नामंज़ूर थी पेशकश तुम्हें दिल की कैसे दिखाऊँ तुम्हें उल्फ़त दिल की मजरूह तेरे प्यार ने मुझको किया देख क्या हालत हो गयी मेरे दिल की यह ज़ौक़े-दर्द वह नख़्वत तेरी कब छुपी है तुमसे हसरत दिल की यह बेसदा आँखें… more →
तख़लीक़-ए-नज़रAmi Jha wrote 1 year ago: I exhorted for pakoda on a rainy evening.My mother gave me 6 rupee in hand to bring besan, for onion … more →
विनय wrote 1 year ago: नामंज़ूर थी पेशकश तुम्हें दिल की कैसे दिखाऊँ तुम्हें उल्फ़त दिल की मजरूह तेरे प्यार ने मुझको किया देख … more →