जे गरीब पर हित करै, ते रहीम बड़लोग कहाँ सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग कविवर रहीम कहते हैं जो छोटी और गरीब लोगों का कल्याण करें वही बडे लोग कहलाते हैं। कहाँ सुदामा गरीब थे पर भगवान् कृष्ण ने उनका कल्य… more →
*** दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता-पत्रिका*** mastram Deepak Bharatdeep ki hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: जे गरीब पर हित करै, ते रहीम बड़लोग कहाँ सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग कविवर रहीम कहते हैं जो छोटी औ … more →
Krishna Kumar Mishra wrote 1 month ago: कुकरबिटेसी परिवार के फ़लॊं के साथ हमारे ग्रामीण जीवन में जो बाते कही जाती है उनका बयान मै यहां कर रह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: जब बहता था दरिया में पानी तब भला कौन वादा करता था उसे लाने का। कहीं बांध बनाये कहीं रास्ता बदला पानी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: शोर कर रही भीड़ में शांति कराने के लिये बहुत तेज आवाज में शोर मचाओगे तो तुम भी शांति के मसीहा हो जाओग … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अंतर्जाल पर रचनाकर्म कोई आसान काम नहीं है। जो लेखक, कलाकर या कार्टूनिस्ट स्वयं न लिखकर दूसरे को अपनी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अपना दर्द यूं जमाने को न दिखाओ दवा देकर इलाज करने वाले हर जगह नहीं मिलते हैं। जो अल्फाजों की जादूगरी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: जब वह जवान थे तब तक लिये खूब लिये उन्होंने मजे अब बुढ़ापे में नैतिक चक्षु जगे। किताबों में छिपाकर खूब … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आखिर यह कोई सुनियोजित एजेंडा है या अनजाने में बन गयी सोच कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और धर्मों पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: सच बोलना कभी कभी ठीक नहीं लगता कड़वा जो होता। सोचता भी नहीं कोई दिमाग की हलचल को सुन न ले दीवारों के … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: बरसात में सड़क पर चलते हुए जब पानी से भरे छोटे छोटे समंदर और कीचड़ के पहाड़ों से गिरता टकराता हूं। तब य … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कवि ने टीवी एंकर से कहा ‘यह मेरे साक्षात्कार का बेकार नाटक रचाया। तुम सवाल करते हुए जवाब भी बताकर उस … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: बरसात की बूंदें जैसे ही आकाश से जमीन पर आई। अकाल राहत सहायता समिति के सदस्यों के चेहरे पर चिंता घिर … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: पर्दे पर आंखों के सामने चलते फिरते और नाचते हांड़मांस के इंसान बुत की तरह लगते हैं। ऐसा लगता है कि जै … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री श्री केविन रूड किसी समय सफाई कर्मचारी का काम करते थे-यह जानकारी अखबार मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: वह कौनसी संस्कृति और संस्कार है जिसके नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है जिसे बचाने के लिये इतने सारे … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कभी शब्द नहीं बनता अकेला शब्द कभी भाषा नहीं बनता। कई मिलकर बनाते हैं एक भाव समूह जिससे उनका निज परिच … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: डरपोक लोगों के समाज में बहादुर बाहर से किराये पर लाये जाते हैं. किसी गरीब को न देना पड़े मुआवजा इसलिए … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भारतीय भाषाओं में सिंधी भाषा का भी अग्रणी स्थान रहा है पर किसी एक प्रदेश की भाषा न होने के कारण अब ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: साली और भाभी पर जो कोई ख्याली शेर लिखा पढ़ते हुए उसे लोगों का ढेर दिखा। जो बयान किये दर्द जमाने के उस … more →