जब वह जवान थे तब तक लिये खूब लिये उन्होंने मजे अब बुढ़ापे में नैतिक चक्षु जगे। किताबों में छिपाकर खूब पढ़ा यौन साहित्य जब मन में आया वयस्कों के लिये लगी फिल्म देखने स्कूल छोड़कर भगे। अब बुढ़ापे में आया है… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***jayantijain wrote 3 weeks ago: यह व्यक्तित्व-विकास एवं स्व-उन्नति से सम्बन्धित ब्लाग है। कोई भी आपकी समस्याओं के बारे में आपसे अध … more →
jayantijain wrote 1 month ago: ब्लाॅग पर ट्राफिक बढ़ाना टेढ़ी खीर है। इ़स पर मुझे टेढ़ी खीर नामक एक कहानी याद आती है। जीवन भर हम सफ़ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आज के बच्चे अपने माता पिता के बाल्यकाल से अधिक तीक्ष्ण बुद्धि के पाये जाते यह सच कहा जाता है। किस ना … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: जब वह जवान थे तब तक लिये खूब लिये उन्होंने मजे अब बुढ़ापे में नैतिक चक्षु जगे। किताबों में छिपाकर खूब … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अखबार में छपी हर खबर पुरानी नहीं हो जाती है। कहीं धर्म तो कहीं भाषा और जाति के झगड़ों में फंसे इंसानी … more →
jayantijain wrote 2 months ago: मैंने जीवन प्रबन्धन पर अपनी आगामी पुस्तक “स्वयं के साथ कैसे रहे” की योजना प्रकाषक मेसर्स … more →
jayantijain wrote 2 months ago: यह व्यक्तित्व-विकास एवं स्व-उन्नति से सम्बन्धित ब्लाॅग है। कोई भी आपकी समस्याओं के बारे में आपसेे … more →
jayantijain wrote 2 months ago: टिप्पणी प्राप्त करने के छ:अनुभूत मन्त्र चिट्ठाकारी में टिप्पणी श्वास के समान हें । ब्लागर टिप्पणी … more →
jayantijain wrote 2 months ago: टिप्पणी कौनसी पोस्ट पर करे व टिप्पणी मे क्या लिखे? प्रत्येक उस पोस्ट पर टिप्पणी करें जो आपको आपको सु … more →
jayantijain wrote 2 months ago: टिप्पणी क्या है व किस पर करें ? टिप्पणी क्या है? टिप्पणी का अर्थ महज अपनी कड़ी पर प्रतिक्रिया का प्रा … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: उसने पूछा ‘क्या तुम बुरे आदमी हो‘ जवाब मिला ‘कभी अपने काम से कुछ सोचने का अवसर ही नहीं मिला इसलिये क … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: सभागार के तले मंच पर चले बहसों के दौर सुबह और शाम। दिन पर चले पर नतीजा सिफर छलकते हैं फिर भी रात को … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: वैसे तो भारतीय संस्कृति और संस्कारों में लोगों को ढेर सारे दोष दिखाई देते हैं पर फिर भी वह उसमें तमा … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये है … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हिंदी में विभिन्न कालों की चर्चा बहुत रही है। सबसे महत्वपूर्ण स्वर्णकाल आया जिसमें हिंदी भाषा के लिय … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: धरती की रौशनी बचाने के लिये उन्होंने अपने घर और शहर में अंधेरा कर लिया फिर उजाले में कहीं वह लोग खो … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अगर चिट्ठाजगत पर दर्ज आंकड़ों को सही मान लिया जाये तो इस लेखक का अंतर्जाल पर यह 3013वां पाठ होना चाह … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अपने वाद्ययंत्रों के साथ सजधजकर वह घर से बाहर निकला और अपनी मां से बोला-‘‘मां, आशीर्वाद दो जंग पर जा … more →