एक टीवी चैनल को उसके मनोरंजक कार्यक्रम में अभद्र और अश्लील शब्दों के प्रयोग पर आखिर नोटिस थमा दिया गया है। हो सकता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कुछ समर्थक इस पर नाराज हों पर यह एक जरूरी कदम है। दरअसल अ… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: एक टीवी चैनल को उसके मनोरंजक कार्यक्रम में अभद्र और अश्लील शब्दों के प्रयोग पर आखिर नोटिस थमा दिया ग … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: अपने साथ फंदेबाज एक पर्चा लेकर आया और हाथ में देते हुए बोला- ‘दीपक बापू, बूढ़े आदमियों के लिये तैयार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक। कहैं कबीर नहिं उलटिये, वही एक की एक।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 month ago: कल तुम गुजर रहे थे , या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था …. कल आहट थी कोई पहचानी , या कोई दरवाजे पर आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हिंदी की सेवा करने का दावा करने वाले बहुत हैं। इनके नाम भी आपने देखे होंगे। यह लोग हिंदी के नाम पर क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: उस उद्यान में ज्ञानियों के बीच देश की गरीबी मिटाने के लिये बहस चल रही थी। विषय था देश में गरीबी और श … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ————————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: एक सज्जन ने मन्नत मांगी थी कि अगर उनको कभी कहीं से कोई सम्मान प्राप्त होगा तो वह किसी नये कवि का सम् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: ग्रहीत्वां दक्षिणां विप्रास्त्यजन्ति यजमानकम्। प्राप्तविद्यां गुरुं शिष्या दग्धाऽरण्यं मृगास्तथा। हि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आज के बच्चे अपने माता पिता के बाल्यकाल से अधिक तीक्ष्ण बुद्धि के पाये जाते यह सच कहा जाता है। किस ना … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: न निह्यवं मन्त्र गचछेत संसृष्टमन्त्रस्य कुसंगतस्य। न च ब्रूयात्रश्वसिमि त्वयीति संकारणं व्यपदेशं तु … more →
Mayur wrote 1 month ago: Jo Khwabon Ka Shehar Hai, Wo Haqiqat Mein Agar Ho, Meri Neend Khule Jahan Par, Wo Tera Mera Ghar Ho. … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अजानन्दाहात्भ्यं पततु शालभे दीपदहने स मीनोऽप्यज्ञानाद्वडियुतमश्नातु पिशितम्। विजानंतोऽप्येतेवयमिह वि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जमींदौज या राख हो चुके इंसानों के राहों पर छपे कदमों को चूम कर उसके निशान जमाने को दिखाते हैं। गुजरत … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: दिल में कुछ दिमाग में कुछ जुबां से दूसरे बोल ही निकल आते हैं। दिल का दिमाग से दिमाग का जुबां से रिश् … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अच्छे विषय पर सोचकर कविता लिखने बैठा युवा कवि कि बिजली गुल हो गयी। कागज पर हाथ था उसका कलम अंधेरे मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: सम्पन्नतरमेवान्नं दरिद्र भुंजते सदा। क्षुत् स्वादुताँ जनयति सा चाढ्येषु सुदुर्लभा।। हिंदी में भावार् … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: डाक्टर साहब बाहर ही मिल गये। उस समय वह एक किराने वाले से सामान खरीद रहे थे और हम पहले लेचुके सामान क … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी की विकास यात्रा नहीं रुकेगी। लिखने वालों का लिखा बना रहेगा भले ही वह मिट जायें। पिछले दिनों कु … more →