wrote 4 years ago: एक राजकुमार को वृद्धों से घृणा थी। वह कहा करता था, ‘बूढ़ों की बुद्धि कुंठित हो जाती है। वे सदा … more →
wrote 4 years ago: एक गुरुकुल में दो राजकुमार पढ़ते थे। दोनों में गहरी मित्रता थी। एक दिन उनके आचार्य दोनों को घुमाने ल … more →
wrote 4 years ago: भगवान बुद्ध श्रावस्ती में ठहरे हुए थे। वहां उन दिनों भीषण अकाल पड़ा था। यह देखकर बुद्ध ने नगर के सभी … more →
wrote 5 years ago: हाल-ए-दिल बयान कर रहे थे जब हम अपना पाक-ए-मोहोब्बत है तुमसे ये मान लिया होता | किसी भी हद्द से गुजर … more →
wrote 5 years ago: एतबार है हमे ज़िंदगी ज़िंदगी जब से रूबरू हमसे हुई है ख़यालो के तूफान थमसे गये है अभी | पहले तो हवा … more →
wrote 5 years ago: हर कवि की कविता हर कवि की कविता अनमोल होती है कोहिनूर से भी ना उसका कोई तोल है | कविता कवि के हृ … more →
wrote 5 years ago: बेवफा हम भी नही मोहोब्बत की राहों पर आज हम साथ नही कसमे जो खाई थी , उनमे कोई बात नही | गुजर गयी कायन … more →
wrote 5 years ago: हाइकू – सवेरा 1. पंछीयो की किलबिल सूरज निकलते ही घरौंदा छोड़े 2. चाँद छुप गया चँदन … more →
wrote 5 years ago: शब्दांचे आंगण किती निराळे शब्दांचे जग एकदम वेगळे शब्दांच्या घरात मी पण रहाते शब्दान मधूनच आपल्या … more →
wrote 5 years ago: खत लिखने की रस्म नयनो में ये घटा,आज फिर घिर आई है खुशियों की बरसात बिन मौसम लाई है | डाकिया कितने दि … more →
wrote 5 years ago: हाइकू- प्रकृति 1.बहती हवाए लहराते हरेभरे खेत … more →
wrote 5 years ago: मुस्कुराहट के गुलाब मुस्कुराहटसे सजे जो लब , नूर-ए-शबाब खिले है एक मुस्कुराहट में हमारी , हज़ारो गुल … more →
wrote 5 years ago: उठो उठो गोपाला पूरब में अरुण रथ आया ,लेकर किरनो का उजाला भोर हुई अब , उठो उठो गोपाला, मेरे नंदलला | … more →
wrote 5 years ago: वो तुम ही तो हो रहता है जो इन झील सी निगाओं में बन कर ख्वाब मेरे,वो तुम ही तो हो | नाम लेती हूँ जिसक … more →
wrote 5 years ago: कितनी शिद्दत से उन्हे,दिल में बसाया इज़हार-ए-मोहोब्बत के लिए , जरासा रुके थे आँखों के सामने से,मेरा … more →
wrote 5 years ago: सोलहवा सावन रिमझिम खनकती बूँदे , जब आंगन में आती है उन भीगे लम्हो को , संग अपने लाती है | बचपन की ला … more →
wrote 5 years ago: ऐसी कशीश है तुझमें ,खिची चली आती हूँ साथ मेरे मन की तरंगे, तुमसे बाटने लाती हूँ | तुमसे मेरा रिश्त … more →
wrote 5 years ago: जान कर भी नही जानती समझकर भी नही समझती दूर से ही होती है अपनी मुलाकात नज़रो ही नज़रों में होती है … more →