आसमान से जो देखा धरती पर तो इंसान चींटियों की तरह सड़क पर रेंगता नजर आया वैसे भी धरती पर इंसान कब इंसान की तरह चल पाया चींटियों की रानी लेती है अपनी प्रजा से सेवा पर इंसान ढूंढता है अपने आराम से रहन… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आसमान से जो देखा धरती पर तो इंसान चींटियों की तरह सड़क पर रेंगता नजर आया वैसे भी धरती पर इंसान कब इ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘क्या दीपक बापू किक्रेट भूल गये देखना पता नहीं तुम्हें अब यहां क्रिकेट मैच चल रह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज श्री सुरेश चिपलूनकर जी ने कुछ फोटो की श्रृंखला भेजी जिसने मेरा मन विचलित कर दिया। वह अकेले ऐसे ब् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी राह चलते जाना है कहीं फूल बरसेंगे तो कहीं लोग ताने कसेंगे थोड़ी खुशी के लिये बहुत दूर तक ढूंढते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ”क्या दीपक बापू हम तो समझते थे कोई भारी भरकम लेखक को पर हम अब समझे हमें भर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.जिस देश में मूर्खों का सम्मान नहीं होता, अन्न संचित रहता है तथा पति-पत्नी में झगडा नहीं होता वहाँ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: विकिपीडिया ज्ञान और विज्ञान की एक बहुत बड़ी वेब साईट है. इसमें हिन्दी से संबंधित पोस्टों के संख्या पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समस्त पाठकों से निवेदं है कि यदि आप मेरी रचनाएं इस ब्लोग पर पढना चाह्ते हैं तो कृप्या कमेंट अवश्य लि … more →