शाम सुहानी सी धूप की चादर को हटाकर बिखर गये नीले स्याह से बादल गरजत बरसात बूँदों का आना ,गालों पर सरका आँख का काजल | ठंडी हवाओं का नज़दीक से गुज़रना नस नस में दौड़ती सहर आँधियों का हमे अपने आगोश में ल… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: शाम सुहानी सी धूप की चादर को हटाकर बिखर गये नीले स्याह से बादल गरजत बरसात बूँदों का आना ,गालों पर सर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: जानते हो तुम कितना गहरा असर होता है तुम्हारा हम पर तुम बरसते हो कही दूर और हरियाली इस पार छा जा … more →