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ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया
ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया सरे-राह मैं अपनी मंज़िल पा गया चराग़… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग … more »
ब्रह्माण्ड
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं अत्यन्त अकेला था अनन्त शून्य था मे … more »
दोस्त, माफ़ कर देना मुझे
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: तुमने पुकारा था जब मैंने सुना तो था मग … more »
तुम आज ही लौट आओ
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: कहाँ है वो चेहरा, गुलाबी चेहरा जिसको द … more »
