विनय wrote 1 year ago: मैं अत्यन्त अकेला था अनन्त शून्य था मेरे अन्दर यूँ ही विचार आया मन में अपना भी हो एक सुन्दर घर कुछ न … more →
विनय wrote 1 year ago: एक गिरह ज़ुबाँ में, सब के होती है वक़्त लगते ही लफ़्ज़ अटका देती है लोग क्या समझते हैं मैं ना-पाक हूँ या … more →