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	<title>brijesh &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
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	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "brijesh"</description>
	<pubDate>Fri, 18 Jul 2008 22:34:06 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[लचर कानून-व्यवस्था और माफ़ियाग्रस्त राजनीति के बहाने कुछ यादें]]></title>
<link>http://kashivishvavidyalay.wordpress.com/?p=152</link>
<pubDate>Mon, 28 Jan 2008 12:20:46 +0000</pubDate>
<dc:creator>अफ़लातून</dc:creator>
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<description><![CDATA[     कोयला , लोहे का कबाड़ , रेलवे के ठेके, ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="left">     कोयला , लोहे का कबाड़ , रेलवे के ठेके, निर्माण , और ड्रग के धन्धे से जुड़ा <strong>बृजेश सिंह</strong> भुवनेश्वर में पकड़ा गया । उत्तर प्रदेश में ५१ हत्याओं के उस पर आरोप हैं। <strong>बी.ज.द./भाजपा</strong> शासित सूबे में वह तीन वर्षों से रह रहा था । उड़ीसा प्राकृतिक संसाधनों की लूट के लिए हो रहे भारी विदेशी पूँजी निवेश के लिए जाना जा रहा है । यह भारी पूँजी निवेश अन्तत: ऐसे तत्वों की जेब में पहुँचता है । दिल्ली पुलिस द्वारा भुवनेश्वर में घेरे जाते ही तत्काल उड़ीसा पुलिस का हस्तक्षेप करवाने में बृजेश सफल रहा । पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक अन्य <strong>माफ़िया मुन्ना बजरंगी</strong> से दिल्ली पुलिस की <strong>'मुठभेड़'</strong> की राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को प्रथम सूचना पूर्व प्रधानमंत्री <strong>चन्द्रशेखर</strong> ने दी थी । मुन्ना बजरंगी की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में चिकित्सा हुई । बृजेश की <strong>'सफल गिरफ़्तारी'</strong> से प्रसन्न भाजपा से विधानपरिषद के लिए चुना गया उसका सगा बड़ा भाई चुलबुल सिंह पिछले तीन दिनों से मिठाई बाँट रहा है । चुलबुल बनारस जिला पंचायत का सदस्य चुना गया तब मुख्यधारा के सभी दल उसके समर्थन में थे ।</p>
<p align="left">     भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिह का पुत्र भी लोहे के कबाड़ के व्यवसाय से जुड़ा है और धन्धे में उसे बृजेश का स्नेह मिलता होगा ,यह माना जाता है । भुवनेश्वर में गिरफ़्तारी के बाद एनडीए के सहयोगी दल बीजद की मशीनरी से राजनाथ द्वारा हस्तक्षेप करवाया गया हो यह भी बहुत सम्भव है ।</p>
<p align="left">    सभी समाचार माध्यमों ने यह जोर - शोर से कहा कि बृजेश को उसके निकट रिश्तेदारों के सिवा किसीने नहीं देखा था और उसकी फोटो उत्तर प्रदेश पुलिस के पास नहीं थी । हमारे देश की लचर न्याय व्यवस्था का यह शर्मनाक नमूना है । हत्या जैसे संगीन जुर्म में गिरफ़्तार अपराधियों के चित्र न खींचना कितने अचरज की बात है ! अप्रैल १९८६ में सिकरौरा गाँव (थाना बलुआ , वर्तमान जिला चन्दौली) के एक यादव परिवार के सात सदस्यों की हत्या के बाद बृजेश के पाँव में गोली लगी थी और कुछ समय बाद वह गिरफ़्तार होने के बाद बनारस जिला जेल में बन्द था । तब वह १७-१८ साल का तरुण।</p>
<p align="left">    उस अवधि में काशी विश्वविद्यालय के छात्र संघ बहाली हेतु चले आन्दोलन के दौरान खुद पर लगे बीसियों आपराधिक मामलों में मैं भी ४० दिन वहीं बन्द था । मैं जनांकिकी में शोध हेतु पंजीकृत होने के बाद विश्वविद्यालय से निलम्बित हो चुका था। निलम्बन के दौरान ही नेट उत्तीर्ण किया था।वजीफा  निर्दोष साबित होने के बाद एक साथ मिला था।मुझ पर तीन अलग अलग हत्या के प्रयास ( ३०२ और ३०७ दोनों जुर्मों की प्रेरक 'हत्या' ही होती है ।),बम फोड़ना ,गिरोहबन्दी  तथा आगजनी आदि की दर्जनों धाराएं लगीं थीं । मेरी जमानत के लिए जो अट्ठारह स्वजन जुटे थे उन्हें ढाई-ढाई हजार की सम्पत्ति के प्रमाण बतौर जमानत पेश करने थे । न्यायाधीश से इन जमानतदारों की बातचीत अत्यन्त रोचक थी :</p>
<p align="left">    मेरे जीजाजी, डॉ. सुरेन्द्र गाड़ेकर से जज ने पूछा , ' आप क्या काम करते हैं ?' तपाक से जवाब मिला ; " अणु उर्जा का विरोध करता हूँ ।' जज मुस्कुराए और आगे कुछ नहीं पूछा।</p>
<p align="left">    मेरी माँ , उत्तरा देसाई ने ढाई हजार की मिल्कियत दिखाने के लिए कहा : " इससे ज्यादा मूल्य की किताबें मेरे पास हैं ।' हाँलाकि वे स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाली केन्द्रीय पेंशन की पासबुक भी साथ ले गयी थी। १९४२ में १४ वर्ष की अवस्था में वह भारत रक्षा अधिनियम के तहत जेल गयी थी और पौने दो साल बाद कटक जेल से रिहा हुई थी । १९८७ में यह पेंशन शायद तीन सौ प्रतिमाह थी। माँ के परिवार के अन्य ९ सदस्य यह पेंशन पाने के हकदार थे लेकिन इन लोगों  ने पेंशन के लिए आवेदन नहीं किया । माँ को २४ वर्ष की अवस्था में मधुमेह हो गया था और प्रतिदिन वह खुद को इन्सुलिन की सूई लगाती थी । इस खर्च को ध्यान में रखते हुए उसके परिवार में सिर्फ़ उसने पेंशन ली।</p>
<p align="left">    बनारस जिला जेल स्थित <strong>'सभा भवन'</strong> में तब राजनैतिक बन्दी ही रहते थे । अब 'सभा भवन' तोड़ा जा चुका है । राजनैतिक जेल यात्रायें भी तो अब बन्द हैं।आज-कल 'जेल-भरो' के तहत पुलिस लाइन से ही रिहाई हो जाती है , बिना जेल के फाटक का मुँह देखे ही।वह मेरी लम्बी जेल यात्राओं में से एक थी। गिरफ़्तारी से बचने के लिए दाढ़ी-मूँछ विहीन हो गया था और अत्यन्त छोटे बाल रख लिए थे। बीपी हेयर कटिंग सेलून के अमरनाथ ने कहा था : " नेताजी,डॉक्टर साहब बन गए।"एक मित्र का कोट भी लिया हुआ था।उसके पहले या बाद में कभी कोट नहीं पहना । इस हुलिया में जब माँ के पास पहुँचा था तब उसे भी मुझे पहचानने में थोड़ा वक्त लगा था। </p>
<p align="left">    बहरहाल , बृजेश के घायल पाँव पर , बाहर से लोहे की छड़ें कसी हुई थीं । उसने जेल के अस्पताल में खुद को भर्ती करा रखा था । वह शतरंज खेलता रहता था। सिकरौरा गाँव के काण्ड को 'नरसंहार' कहा जा रहा था इसलिए इस लड़के की ओर सबका ध्यान जाना लाजमी था।</p>
<p align="left">    राजेन्द्र राजन की <strong><a target="_blank" href="http://kashivishvavidyalay.wordpress.com/2006/09/27/bhu-hindi-varanasi/">इस</a></strong> कविता को <a target="_blank" href="http://kashivishvavidyalay.wordpress.com/2006/09/29/vishvavidyalay-rajendra-rajan-gandhi-malaviya/">एक परचे</a> में छापा था - <strong>समता युवजन सभा</strong> और <strong>प्रगतिशील छात्र संगठन</strong> ने संयुक्त रूप से। परचे की सहयोग राशि १५ पैसे थी। परचे की बिक्री से आई बत्तीस रुपए की रेचकारी के साथ लंका के एक कैफ़े में इडली खाते वक्त दरोगा ने गिरफ़्तार करने की सूचना दी थी।<strong> 'माया'</strong> में कभी कविता नहीं छपती थी लेकिन छात्रसंघ बहाली आन्दोलन पर निकले अंक में दिनेश 'दीनू' ने उक्त कविता को 'बॉक्स' में छापा था ।</p>
<p align="left">    इस चिट्ठे का नाम - <strong> यही है वह जगह ,</strong> उस कविता से लिया गया है । राजन की राजनैतिक प्रतिबद्धता की बुनियाद इस रचना में झलकती है।</p>
<div style="display:inline;margin:0;padding:0;" class="wlWriterSmartContent">Technorati tags: <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a5%9e%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be">माफ़िया</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3">अपराधीकरण</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%ac%e0%a5%83%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%b6">बृजेश</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5">राजनाथ</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/%e0%a4%9b%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%98%20%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80">छात्रसंघ बहाली</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/brijesh">brijesh</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/crimanalisation">crimanalisation</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/mafia">mafia</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/rajnath%20singh">rajnath singh</a>, <a rel="tag" href="http://technorati.com/tags/bjp">bjp</a></div>
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