रातें थी सूनी सूनी, दिन भी उदास थे मेरे, तुम मिल गए तो जागे सोये हुए सवेरे, खामोश इन लबो को एक रागिनी मिली है, मुरझाये से गुलो को एक ताजगी मिली है, घेरे हुए थे मुझ को कब से घने अंधेरे, रूठा हुआ था मुझ… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: रातें थी सूनी सूनी, दिन भी उदास थे मेरे, तुम मिल गए तो जागे सोये हुए सवेरे, खामोश इन लबो को एक रागिन … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: सर ही न झुका, दिल भी तो झुका, कल्याण यंही होगा, निर्वाण यही होगा, इन दीवारों से बातें कर, मत छलका तू … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: जिन्दगी तुझको जिया है कोई अफ़सोस नहीं, ज़हर ख़ुद मैंने पिया है कोई अफ़सोस नहीं, मैंने मुजरिम को भी म … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: शायद मैं जिन्दगी की सहर ले के आ गया, कातिल को आज अपने ही घर ले के आ गया, ता उम्र धुंद्ता रहा मंज़िल म … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ढल गया आफताब ऐ साकी, ला पिला दे शराब ऐ साकी, या सुराही लगा मेरे मुँह से, या उलट दे नकाब ऐ साकी, मैकद … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: जिस मोड़ पर किए थे हम इन्तेजार बरसों, उससे लिपट के रोये दीवाना-वार बरसों, तुम गुलसितां से आए ज़िक्र ख … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी शबाब की नक़ाब गुम बड़ी हसीन रात थी। मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद … more →