सावन के पानी में छप छप करना किसी के मुख मुस्कान वास्ते जानबूझ कीचड़ में फिसलना वो हर्ष के धब्बे उठे मौजूद है मन की काँच पर आज भी… ============== दूर नभ में स्थित हो मन मचलता है तुम्हे पान… more →
mehekदीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि ———————— तारा मण् … more →
mehhekk wrote 5 months ago: सावन के पानी में छप छप करना किसी के मुख मुस्कान वास्ते जानबूझ कीचड़ में फिसलना वो हर्ष के धब्बे उ … more →
Indrajeet wrote 7 months ago: प्रिय पाठकों, ब्लोगिंग की शुरुआत, आज से करीब पाँच साल पहले हुई. तब से आज तक हैरतंगेज तरीके से इसकी व … more →
mehhekk wrote 7 months ago: मन की आशायें भी बड़ी अजीब होती है शाम ढलते ही नीम तले जाकर खड़ी हो गई सोचती है गर टहनी टूटी तो उसपर … more →
mehhekk wrote 8 months ago: बड़ी दुविधा में है आज हम | हमारा नाज़ुक सा दिल एक कोने रूठा बैठा है | वजह पूछी रूठने की ,कहत … more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.मुट्ठी भर चाँदनी पहेले रोज़ खिड़की पर आता था रात रात हमसे बतियाता था भोर की रश्मि आने पर भी हमे न … more →
mehhekk wrote 1 year ago: त्रिवेणी 1.लफ़्ज़ों का सज़ा कर नगमा हाल-ए-दिल सुनाया उनके लबों की मुस्कान देख समझे हमने उन्हे मनाया … more →
mehhekk wrote 1 year ago: गुलदस्ता - मोहोब्बत का [1] फ़िज़ा के रंग कुछ सवरने लगे है हवाओं के रुख़ कुछ बदलने लगे है स … more →
mehhekk wrote 1 year ago: रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान चाँद के बिन सितारे अधूरे से लगते है | समंदर की गहराई में छुपाया जो … more →
mehhekk wrote 1 year ago: देखिए आप हमे चन्दा ना कहलाये ये सुनकर आज कल हमसे पहले वो आसमान का चाँद ही शरमाये जो लफ्जे तारीफ आप ह … more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.जाम पर जाम छलकते रहे आँखों में सपने पनपते रहे मोहोब्बत-ए-महफ़िल सजी रात भर शमा जलती रही तेरा आन … more →
mehhekk wrote 1 year ago: वही पलाश के फूल लाना तुम चले जो कभी लहराती हवाये काया को मृदुसी छुकर जाये हमारी छुअन का आभास कराये … more →
mehhekk wrote 1 year ago: चँदनी रात है नींबुआ के पीछे छुपा बैठा जो मध्यम मध्यम मुस्कुराता रहता वो मेरे सलोने चाँद से सजना मैं … more →
mehhekk wrote 1 year ago: दीदार खुश है मेरी बन्नो,आज मधुचंद्र की रात सज सवर कर बैठी है नही करती किसीसे बात कुछ भी कहो ,ग … more →