मनु महाराज कहते है कि ———————————– प्राज्ञं कुलीनं शूरं च दक्षं दातारमेव च। कृतज्ञः धुतिमंत च कष्टमाहुररि बुधाः।। हिंदी में भावा… more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते है कि ——————————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: परकार्यविहन्ता च दाम्भिकः स्वार्थसाधकः। छली द्वेषी मृदः क्रूरो विप्रो मार्जार उच्यते।। हिंदी में भाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: मुहूर्तमपि जीवेच्च नरः शुक्लेन कर्मणा। न कल्पमपि कष्टेन लोक़द्वयविरोधिना।। हिदी में भावार्थ- अगर अच्छ … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: न निर्मितः केन न दृष्टपूर्वः न श्रूयते हेममयः कुरंगः। तथापि तृष्णा रघुनंदनस्य विनाशकाले विपरीत बुद्ध … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अलिरय नलिनीदलमध्यगः मलिनीमकरंदमदालसः। विधिवशात्परदेशमुपागतः कुटजपुष्परसं बहु मन्यते।। हिन्दी में भाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: संसार विषवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे। सुभाषितं च सुस्वादु संगतिः सुजने जनै।। हिन्दी में भावार्थ-नीति … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः।। नीति विशारद चाणक्य कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.धन से धर्म, खाने पीने और योग से विद्या, शक्ति से राज्य तथा गुणवान पत्नी से घर की रक्षा होती है। 2. … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.पाँव धोने का जल और संध्या के उपरांत शेष जल विकारों से युक्त हो जाता अत: उसे उपयोग में लाना अत्यंत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ईर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है। अपनी असफलता और दूसरे की सफलता से मनुष्य ईर्ष्यालु हो जाता। ईर्ष्या … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.आकाश में बैठकर किसी से वार्तालाप नहीं हो सकता, वहां कोई किसी का संदेश वाहक न जा सकता है और न वहां … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जिन व्यक्तियों के पास विद्या, दान, शील तप के गुण नहीं हैं वह व्यक्ति इस पृथ्वी पर बोझ है और वह पशु … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जीवनां मृतवन्मन्ये देहिनं धर्मवर्जितम् मृतो धर्मेण संयुक्तो दीर्घजीवन न संशयः धर्म रहित प्राणी जीवित … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अर्थाधीतांश्च यैवे ये शुद्रान्नभोजिनः मं द्विज किं करिध्यन्ति निर्विषा इन पन्नगाः जिस प्रकार विषहीन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.अपने परिवार के सदस्यों के साथ उदारता, अन्य लोगों के साथ दया, कुटिल से कठोरता, सज्जनों से प्रेम तथा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ऐसा व्यक्ति अविश्वसनीय होता है जो क्रुद्ध होने पर सारे भेद देता है। ऐसा व्यक्ति कदापि मित्रता के य … more →