मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम, एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम, आंसू छलक छलक के सतायेंगे रात भर, मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम, जब दूरियों की याद दिलों को जलायेगी, जिस्मों को चांदनी में भि… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम, एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम, आंसू छलक छलक के सतायेंगे रात … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे, जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा, जिनको इक उम्र कलेजे से … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: मुझसे मिलने के वो करता था बहाने कितने, अब गुजारेगा मेरे साथ ज़माने कितने, मैं गिरा था तो बहुत लोग रु … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हम तो हैं परदेस में देश में निकला होगा चाँद, अपनी रात की छत पर कितना तन्हा होगा चाँद, जिन आंखों में … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: दिल के उजले कागज़ पर हम कैसा गीत लिखें, बोलो तुमको गैर लिखें या अपना मीत लिखें, नीले अम्बर की अंगनाई … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: गम मुझे हसरत मुझे वहशत मुझे सौदा मुझे, एक दिल देकर खुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे, ये नमाज-ऐ-इश्क है … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे, मैं तुझको भूल के जिंदा रहूँ खुदा न करे, रहेगा साथ तेरा प् … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता कभी जान सदक़े होती कभी दिल निछार होता कोई फ़ितना था क़यामत ना फिर … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई वो सई-ए-क़रम फ़रमा भी गए इस सई-ए-क़रम का क्या कहिये बहला भी गए तड़पा भी गए हम … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रात भर दीदा-ए-ग़म नाक में लहराते रहे सांस की तरह से आप आते रहे जाते रहे खुश थे हम अपनी तमन्नाओं का ख़् … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: किसी का यूं तो हुआ कौन उम्रभर फिर भी ये हुस्न-ओ-इश्क़ तो धोखा है सब मगर फिर भी हज़ार बार ज़माना इधर से … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: इश्क़ के शोले को भड़काओ कि कुछ रात कटे दिल के अंगारे को दहकाओ कि कुछ रात कटे हिज्र में मिलने शब-ए-मा … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-मीर सुनाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-दर्द में इक ज़िंदगी तो होती है … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक चमेली के मंड़वे तले मैकदे से ज़रा दूर उस मोड़पर… दो बदन… दो बदन…… दो बदन प्यार की आग में जल गए प्यार … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: देखना जज़्बे मोहब्बत का असर आज की रात मेरे शाने पे है उस शोख़ का सर आज की रात नूर ही नूर है किस सिम्त … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: शहर की रात और मै नाशाद-ओ-नाकारा फिरूं जगमगाती जागती सड़कों पे आवारा फिरूं ग़ैर की बस्ती है कब तक दर-ब- … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा अलविदा ऐ सरज़मीन-ए-सुबह-ए-खन्दां अलविदा अलविदा ऐ किशवर-ए-शेर-ओ-श … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अब मेरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो? मैने माना के तुम इक पैकर-ए-रानाई हो चमन-ए-दहर में रूह-ए-चमन आरा … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अब अक्सर चुप-चुप से रहे हैं यूं ही कभू लब खोले हैं पहले “फ़िराक़” को देखा होता अब तो बहुत … more →