आज जब 1300 से ज्यादा हिंदी चिट्ठे हैं, हर चिट्ठे को पढ़ पाना मुमकिन नहीं है। फिर यह भी हो सकता है कि कवितायें पढ़ने वालों को शेयरबाजार के चिट्ठों में रुचि न हो। यह भी हो सकता है कि खेलों से जुड़े चिट्ठे … more →
हिंदी टूलबार - पिटाराजगदीश भाटिया wrote 1 year ago: आज जब 1300 से ज्यादा हिंदी चिट्ठे हैं, हर चिट्ठे को पढ़ पाना मुमकिन नहीं है। फिर यह भी हो सकता है कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.प्रत्येक व्यक्ति की दृष्टि अलग-अलग होती है, एक ही शरीर जी तीन ढंग से देखते हैं. योगी इसे नश्वर रू … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: क्या आपको यह खोजना है कि आपका चिट्ठा चिट्ठाजगत.इन पर है कि नहीं? किसी और चिट्ठे को खोजना चाहते हैं? … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बीस के शेर पचास में ढ़ेर जीतते हैं तो फुलाते सीना हारें तो कहें’समय का फेर’ समझाया था क्य … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रिश्ते की बात करते हुए वर पक्ष ने जमकर डींग मारीं ‘हमारे पास अपना आलीशान मकान है अपनी बहुत बड़ी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1. हजारों गायों की बीच जिस तरह बछड़ा अपनी मा के पास जाता है वैसे ही मनुष्य का कर्म भी उसी में … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.सुकर्म करने वाले कभी भी लोग,भोग, योग और पत्र(रुपया-पैसा) का संचय नहीं करते। इसी कारण उनका … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जौन चाल संसार के जौ साधू को नाहिं डिंभ चाल करनी करे, साधू कहो मत ताहिं संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ‘कबीर’ मन फूल्या फिरै,करता हूँ मैं प्रेम कोटि क्रम सिरि ते चल्या, चेत न देखै भ्रम संत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जिसके प्रति लगाव(सच्चा प्यार) वह दूर होते हुए भी पास रहता है। इसके विपरीत जिसके प्रति लगाव नहीं है … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: हिंदी टूलबार में हमने कुछ चुने हुए चिट्ठों के लिंक जोड़े हुए थे। यह संभव भी नहीं था कि सारे हिंदी चि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पांच दिन से एक दिन अब क्रिकेट खेल के रह गये बीस ओवर बाजार में देश प्रेम की भावनाओं का भुनाते ख़ूब चल … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: चिट्ठाजगत के धड़ाधड़ महाराज हमें कई तरह की सुविधायें देते हैं। चिट्ठाजगत हमें कई प्रारूपों में तो मिल … more →