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Blogs about: Choti Si Baat

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कुल का अंत तमाम हुआ

vikasvardhan wrote 1 month ago: भरी सभा के बीच खड़ी वो चन्द्रवंश की शोभा थी ललकार लहू को मार रही वो अग्नि सम आभा थी लज्जा की मूरत का … more →

कुछ बातें

vikasvardhan wrote 2 years ago: कर्म न समझे पुण्य को, कर्म न जाने पाप जिसकी जैसी भावना, फल उसके अनुपात अधिक न्यून के माप को, जो मापे … more →

vikasvardhan wrote 2 years ago: फिर गुजरेगी मस्त वो हवा, फिर यह गुलशन लहरायेगा जो तुझसे छीना एक झोंके ने, दूजा वापस ले आएगा, हर दौर … more →

टाँगे यहाँ खींचने को कई हैं

vikasvardhan wrote 2 years ago: हँसी का सच्चा गुल जब खिला है दर्दों की पहले बारिश हुई है कागज़ के गुल कभी भी सजा लो टाँगे यहाँ खींचन … more →


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